Monday 26/ 02/ 2024 

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गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर पर्यावरण भारती ने किया पौधरोपण

सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट 

  सिक्ख पंथ के दसवें गुरू एवं खालसा पंथ के संस्थापक तथा बिहार के वीर सपूत गुरू गोविन्द सिंह के जन्म दिन पर पर्यावरण भारती द्वारा बुधवार को खेरा प्रखंड के नवडीहा गांव में विविध प्रकार के पौधे लगाए गए । बिहार में भारत के कई महारूषों का जन्म हुआ है उनमें सिक्ख पंथ के 10 वें गुरू गोविन्द सिंह एक हैं । उनका जन्म पटना साहिब में पौष शुक्ल पक्ष सप्तमी को हुआ था । बुधवार 17 जनवरी 2024 सप्तमी तिथि को उनका जन्म दिन है । इसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता है । आज उनका 375 वाॅ अवतरण दिवस है । गुरू गोविन्द सिंह का बचपन का नाम गोविन्द राय है । उनकी माता गुजरी एवं पिता 9 वें गुरू तेग बहादुर थे । धर्म रक्षा हेतु गुरू तेग बहादुर जी बलिदान हुए । सन 11 नवंबर 1675 को मात्र 9 वर्ष की उम्र में गोविन्द सिंह अंतिम और 10 वें गुरू बने , वे माता-पिता के इकलौते पुत्र थे । पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि संसार के इतिहास में गुरू गोविन्द सिंह ऐसा बलिदानी परिवार विरले हैं । उनका पूरा परिवार धर्म रक्षा हेतु शहीद हो गये । उनको 4 पुत्र थे । उनमें 2 पुत्र अजीत सिंह एवं जुझार सिंह विधर्मियों से लड़ते हुए युद्ध के मैदान में शहीद हो गये । शेष 2 पुत्रों जोरावर सिंह ओर फतेह सिंह को इस्लाम कबूल नहीं करने पर 26 दिसंबर 1704 को चंडीगढ़ के निकट फतेहगढ़ साहिब में सरहिन्द के नबाब ने ईंट के दीवार में जिन्दा चुनवा दिये । माता गुजरी को किले की दीवार गिराकर विधर्मियों ने शहीद कर किया ।

 गुरू गोविन्द सिंह ने धर्म रक्षा हेतु ही खालसा पंथ की स्थापना किये थे । पुरूषों को सिंह और मातृ शक्ति को कौर की उपाधि प्रदान किये। सभी सिक्खों को 5 क अनिवार्य किये जिसमें केश , कंघी , कच्छ , कृपाण और कड़ा । इसे पंच ककार कहा जाता है । गुरू गोविन्द सिंह महान योद्धा के साथ साथ विद्वान महापुरूष थे । वे संस्कृत , पंजाबी , अरबी , उर्दू समेत कई भाषाओं के ज्ञाता थे ।उनका उद्देश्य समाज में समरसता लाना , भेदभाव दूर करना , दमन का विरोध और धर्म की रक्षा करना था । बिते सात अक्टूबर 1708 को विधर्मियों ने धोखे से गुरू गोविन्द सिंह पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला कर घायल कर दिया। उन्होंने सिक्खों को अंतिम उपदेश दिये कि भविष्य में अब कोई गुरू सिक्ख पंथ में नहीं होगा । उनके स्थान पर पवित्र गुरू ग्रंथ साहिब होगा । अंत समय उन्होंने गुरू ग्रंथ साहिब को नमन कर प्राण त्याग दिये । ऐसे बलिदानी महापुरूष के जन्म दिन पर पौधारोपण स्मरणीय कार्य है । वृक्षारोपण कार्यक्रम में पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य , निरंजन कुमार सिंह , गौतम कुमार सिंह , रणजीत कुमार राठौर , अनमोल कुमारी , सुधांशू सिंह , आकाश सिंह , प्रसिद्ध सिंह , अर्पित कुमार , दिव्यांशी कुमारी , शिवम , धनंजय , आशीष तथा नकुल कुमार सिंह आदि लोगों ने भाग लिया ।

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