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मासूमो बच्चों को अकेला छोड़ना बन रहा खतरे की घंटी: डॉ. गौरव मिश्रा

मासूमो बच्चों को अकेला छोड़ना बन रहा खतरे की घंटी: डॉ. गौरव मिश्रा

रोहतास संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट 

बिक्रमगंज (रोहतास)। इधर बीच हर छोटे बड़े शहरों में बच्चों के लापता और अपहरण की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अभी हाल के दिनों में शाहाबाद क्षेत्र के कई इलाकों में बच्चा चोरी और लापता होने की घटनाएं सुनने को मिल रही हैं और कहीं -कहीं अपराधी पकड़े भी गए।

यही नहीं बिक्रमगंज के आसपास के क्षेत्रों में बच्चों से जुड़े हादसों की घटनाओं ने एक बार फिर अभिभावकों को सतर्क कर दिया है। ऐसी छोटी-सी असावधानी कई बार बड़ी अनहोनी का रूप ले लेती हैं।

पटना के वरिष्ठ डॉ. गौरव मिश्रा जो ‘पटना यूरो- गायनी स्टोन’ के डायरेक्टर हैं और इस तरह की घटनाओं को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहते हैं कि ऐसी बढ़ती घटनाओं के बीच अभिभावक अपनी निगरानी बढ़ायें और सुरक्षा को दें सर्वोच्च प्राथमिकता। बच्चों को घर, छत, गली या बाजार में अकेला छोड़ना जोखिम को न्योता देने जैसा है। बाल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र के बच्चे खतरे का आकलन करने में सक्षम नहीं होते।

घर के भीतर रसोई गैस,बिजली के खुले तार,पानी से भरे बर्तन,बालकनी और सीढ़ियां दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। वहीं बाहर खेलते समय सड़क दुर्घटनाएं,अनजान लोगों से संपर्क या रास्ता भटकने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों की जिज्ञासा स्वाभाविक है, लेकिन यही जिज्ञासा उन्हें जोखिम के करीब ले जाती है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को अकेला न छोड़ें, उनकी गतिविधियों पर सतत नजर रखें और समय-समय पर सुरक्षा संबंधी जरूरी बातें समझाते रहें।

वैसे सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से लोगों से अपील की है कि यदि कोई बच्चा असुरक्षित या अकेला दिखाई तो प्रशासन या परिजनों को सूचित करें। आखिरकार बच्चों की हिफाजत ही समाज के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

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