बांकीपुर उपचुनाव: एक विधायक चुनने का चुनाव या बिहार की तकदीर बदलने की महापरीक्षा?
रिपोर्ट बिरेंद्र चंद्रवंशी
पटना की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। एक कड़वा और सीधा सच सुनिए…इस चुनाव में न तो भाजपा के जीतने से सरकार को कोई फर्क पड़ेगा और न ही राजद-कांग्रेस के जीतने से बिहार की सरकार गिरेगी।
तो फिर यह चुनाव इतना खास क्यों है? एक बार ठंडे दिमाग से सोचिए…यदि इस उपचुनाव के जरिए प्रशांत किशोर (PK) बिहार विधानसभा पहुंच जाते हैं तो बिहार की राजनीति पर इसका क्या असर होगा?
प्रशांत किशोर को यदि सिर्फ विधायक-सांसद या मंत्री बनना होता तो यह उनके लिए बाएं हाथ का खेल था।
उन्हें गांवों की खाक छानने की जरूरत नहीं थी, देश के 13 मुख्यमंत्रियों को कुर्सी तक पहुंचाने वाला इंसान चाहता तो खुद किसी भी राज्य से रातों-रात राज्यसभा पहुंच सकता था लेकिन प्रशांत किशोर का लक्ष्य कोई मंत्री पद या सत्ता का सुख भोगना है ही नहीं।
यह PK को विधायक बनाने का नहीं बिहार के हक का चुनाव है!
पिछले तीन दशकों से बिहार की विधानसभा में सिर्फ जाति, धर्म और तुष्टीकरण पर कीचड़ उछाला गया है। क्या कभी युवाओं के पलायन, वर्ल्ड क्लास स्कूलों या अस्पतालों पर गंभीर रोडमैप बना?
जब प्रशांत किशोर विधानसभा के भीतर बैठेंगे, तो बिहार की राजनीति का एजेंडा बदल जाएगा।
सदन के अंदर जब वह आंकड़ों, फैक्ट्स और विज़न के साथ बोलेंगे, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी जातियों की चादर छोड़कर विकास, शिक्षा और रोजगार पर बात करनी ही पड़ेगी। वह अकेले पूरे बिहार के हक की गूंज बनेंगे।
बांकीपुर के भाई-बहनों, अब फैसला आपके हाथ में है…
इस बार मजबूरी में नहीं, बदलाव के लिए वोट कीजिए। क्या आपको भी लगता है कि प्रशांत किशोर का विधानसभा पहुंचना बिहार के भविष्य के लिए क्रांतिकारी कदम होगा?
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