[wpdts-weekday-name] [wpdts-day]/ [wpdts-month]/ [wpdts-year] 

पूर्व 20 सूत्री उपाध्यक्ष व जदयू नेता जगदीश कुशवाहा को श्राद्धकर्म पर दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलिबिक्रमगंज: जनता दरबार में 107 परिवादियों की समस्याओं की हुई सुनवाईस्वतंत्रता सेनानी स्व. लक्ष्मी प्रसाद उर्फ फुलचंद माथुरी की 32वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, परिजनों ने किया भावपूर्ण स्मरणपोषण मेला का भव्य आयोजन, पोषण मेले में सजे सेहतमंद व्यंजन, स्वस्थ जीवन का दिया संदेशझाझा में मनाई गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंतीवंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर झाझा में भव्य आयोजनबेस्ट टू आर्ट प्रतियोगिता में 10 स्कूलों के 266 बच्चों ने भाग लियासारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू, 29 सितंबर से नामांकनजमुई की घटना से मर्माहत है महिला समाज: आकांक्षा किरण, नगर परिषद् सदस्यफंदे से लटकती मिली महिला की लाश, मायके वालों ने लगाया हत्या का आरोप
उत्‍तर प्रदेशटॉप न्यूज़देशभाषाराज्य

अब OPD में आने वाले मरीजों की अस्पताल में ही बनेगी आभा आईडी, CMO ऐसे पूरा कराएंगे टारगेट

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाई.के. राय ने बताया कि चंदौली की लगभग 24.50 लाख आबादी को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य है।

CHC-PHC समेत सभी सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था लागू

रोजाना देनी होगी जिम्मेदार लोगों को अपनी रिपोर्ट

डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र के लिए CMO ने बनायी नयी रणनीति

चंदौली जिले में अब जिले के मरीजों को आभा आईडी (डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र) बनवाने के लिए अलग-अलग केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी किया है कि जनपद के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों जैसे जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और शहरी पीएचसी—में ओपीडी पर आने वाले हर मरीज की वहीं आभा आईडी बनाई जाएगी।

इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाई.के. राय ने बताया कि चंदौली की लगभग 24.50 लाख आबादी को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके लिए सभी स्वास्थ्य इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि ओपीडी में पंजीकरण के दौरान ही मरीज की आभा आईडी बनाई जाए। इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थियों की आभा आईडी भी प्रसव केंद्रों पर अनिवार्य रूप से तैयार कराई जाएगी।

इस प्रकार रोजाना देनी होगी रिपोर्ट
प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी से रोजाना यह रिपोर्ट ली जाएगी कि कितने मरीजों की आभा आईडी बनाई गई। निगरानी के लिए “आभा आईडी एवं ई-संजीवनी” नाम से एक वाट्सएप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें बीसीपीएम को प्रतिदिन रिपोर्ट भेजनी होगी।

क्या है आभा आईडी?
यह 14 अंकों की एक यूनिक डिजिटल पहचान संख्या होती है, जिसे मरीज अपने मोबाइल पर भी सक्रिय कर सकते हैं। इसके माध्यम से व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट, दवाएं, पर्चियां, ब्लड ग्रुप और उपचार से जुड़ी जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध रहती हैं। डॉक्टर इस आईडी के जरिए मरीज के पिछले इलाज को देखकर आगे की चिकित्सा कर सकेंगे।

मरीजों को होंगे ये लाभ:
हर बार रिपोर्ट या पर्ची लाने की जरूरत नहीं,पुराने इलाज का रिकॉर्ड डॉक्टर के सामने,इलाज की प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी,सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सहूलियत होगी।

स्वास्थ्य विभाग की यह पहल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

 

Check Also
Close