
पतिव्रता नारी की शक्ति सर्व श्रेष्ठ: श्री जीयर स्वामी जी महाराज
सती अनुसुईया का पति व्रत धर्म भगवान को भी झुकने पर मजबूर कर दिया
रोहतास दावथ संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट
दावथ (रोहतास): परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रवचन करते हुए भगवान दत्तात्रेय के अवतार को विस्तार से बताया। भगवान विष्णु के पांचवें अवतार दत्तात्रेय के रूप में हुआ था।
भगवान दत्तात्रेय के रूप में कैसे अवतरित हुए यह बड़ा ही विचित्र घटना है। श्रीमद् भागवत कथा के अंतर्गत भगवान के 24 अवतार में दत्तात्रेय जी का अवतार सती अनुसुईया के पुत्र के रूप में हुआ था।
स्वामी जी ने कहा कि पतिव्रता स्त्री का सत्य, तेज, प्रकाश बहुत ही श्रेष्ठ होता है। नारी देश की वह शक्ति है, जो भाग्य जगाने वाली है। नारी देश की वह शक्ति है, जो नई दिशा दिखलाने वाली है। नारी देश की वह शक्ति है जो व्यक्तियों के दिशा और दशा को बदलने वाली है।
नारी कोई साधारण स्त्री नहीं होती है, बल्कि एक पत्नी के रूप में पति के भाग्य को बदलने वाली होती है। वहीं नारी जब माता के रूप में होती है, तो वह अपने पुत्र और पुत्री के भाग्य निर्माता की पहली गुरु होती है। हम संसार में जितने भी लोग हैं, उनको भी सृष्टि में लाने वाली नारी ही हैं।
नारी नर और नारायण को भी जन्म देने वाली होती है। भगवान के रूप में जन्म देने वाली भी नारी ही होती है। इसीलिए नारी को जगत की जननी भी कहा जाता है।
पतिव्रता नारी की शक्ति ब्राह्मणी, पार्वती एवं लक्ष्मी जी से भी अधिक बताया गया है। पतिव्रता नारी किसे कहा जाता है। वैसी स्त्री जो अपने पति के मर्यादा के अनुकूल जीवन जीती है।
उसे पतिव्रता नारी कहा जाता है। जो पत्नी अपने पति को ही ईश्वर, भगवान मानकर उनके आराध्या बनकर जीवन के हर काम को करती है वहीं पतिव्रता नारी है।




















