
अगरेड़ में हुआ अखिल अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन का आयोजन
रोहतास दावथ संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट
दावथ (रोहतास ) भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के तत्वाधान में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन के अवसर पर अखिल अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें भारत के अलग-अलग धर्म क्षेत्र से आए हुए संत महात्मा शामिल हुए।
धर्म सम्मेलन में मानव और धर्म के आधार पर चर्चा हुई जिसमें मानव और धर्म का मजबूत स्तंभ क्या है इसी पर अलग-अलग क्षेत्र से आए संत महात्माओं ने अपना विचार व्यक्त किया।
धर्म संसद में श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन संघर्षमय रहा उन्होंने कभी संघर्ष का त्याग नहीं किया श्री कृष्ण से हमें एक और बड़ा संदेश प्राप्त होता है।
उनके जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आई लेकिन उन्होंने कभी अपने चेहरे से मुस्कान को अलग नहीं किया श्री कृष्ण के चेहरे पर हमेशा आपको सकारात्मक ऊर्जा दिखाई पड़ता है।
उनका स्वरूप खुशी से भरा हुआ दिखाई पड़ता है मानव जीवन में धर्म के पथ पर खड़े रहने के लिए हमें भी अपने जीवन में संघर्ष के साथ आगे बढ़ने का संदेश प्राप्त होता है जिसमें हमें अपने चेहरे पर आशा की नई किरण को देखते हुए हमेशा प्रसन्नता के साथ संघर्षमय जीवन की ओर अग्रसर होना चाहिए।
बड़ी मठिया आरा एवं बक्सर त्रिदंडी देव स्वामी समाधि स्थल के महंत श्री अयोध्या नाथ स्वामी जी ने भी धर्म और मानव जीवन पर अपना संदेश दिया। उन्होंने अपने संदेश के साथ मधुर भजन का गायन करके सभी भक्त श्रद्धालुओं को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।
हरिद्वार क्षेत्र से आए जगतगुरु श्री बैकुंठ नाथ स्वामी जी महाराज ने भी धर्म और मानव जीवन पर अपना संदेश दिया। उन्होंने कहा मानव जीवन का मूल आधार धर्म है धर्म से ही हमारा कर्म संचालित होता है जो भी हम काम करते हैं।
उसे अपने विवेक के साथ करते हुए भगवान की आज्ञा मानकर करना चाहिए जिससे हमारा कर्म धर्म और मानव जीवन तीनों सफलता की ओर अग्रसर होता है।
इस धर्म सम्मेलन में मंच पर प्रयागराज से पधारे जगतगुरु श्री मुक्तिनाथ स्वामी जी महाराज, उद्धव प्रपन्नाचार्य स्वामी जी महाराज एवं अन्य संत महात्माओं ने भी अपने उपदेश से लोगों को लाभान्वित किया। धर्म सम्मेलन में अगरेड़ में हुआ धर्म सम्मेलन का आयोजन।
भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के तत्वाधान में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन के अवसर पर अखिल अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें भारत के अलग-अलग धर्म क्षेत्र से आए हुए संत महात्मा शामिल हुए।
धर्म सम्मेलन में मानव और धर्म के आधार पर चर्चा हुई जिसमें मानव और धर्म का मजबूत स्तंभ क्या है इसी पर अलग-अलग क्षेत्र से आए संत महात्माओं ने अपना विचार व्यक्त किया।
धर्म संसद में श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन संघर्षमय रहा उन्होंने कभी संघर्ष का त्याग नहीं किया श्री कृष्ण से हमें एक और बड़ा संदेश प्राप्त होता है।
उनके जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आई लेकिन उन्होंने कभी अपने चेहरे से मुस्कान को अलग नहीं किया श्री कृष्ण के चेहरे पर हमेशा आपको सकारात्मक ऊर्जा दिखाई पड़ता है उनका स्वरूप खुशी से भरा हुआ दिखाई पड़ता है।
मानव जीवन में धर्म के पथ पर खड़े रहने के लिए हमें भी अपने जीवन में संघर्ष के साथ आगे बढ़ने का संदेश प्राप्त होता है जिसमें हमें अपने चेहरे पर आशा की नई किरण को देखते हुए हमेशा प्रसन्नता के साथ संघर्षमय जीवन की ओर अग्रसर होना चाहिए।
बड़ी मठिया आरा एवं बक्सर त्रिदंडी देव स्वामी समाधि स्थल के महंत श्री अयोध्या नाथ स्वामी जी ने भी धर्म और मानव जीवन पर अपना संदेश दिया। उन्होंने अपने संदेश के साथ मधुर भजन का गायन करके सभी भक्त श्रद्धालुओं को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।
हरिद्वार क्षेत्र से आए जगतगुरु श्री बैकुंठ नाथ स्वामी जी महाराज ने भी धर्म और मानव जीवन पर अपना संदेश दिया। उन्होंने कहा मानव जीवन का मूल आधार धर्म है धर्म से ही हमारा कर्म संचालित होता है जो भी हम काम करते हैं।
उसे अपने विवेक के साथ करते हुए भगवान की आज्ञा मानकर करना चाहिए जिससे हमारा कर्म धर्म और मानव जीवन तीनों सफलता की ओर अग्रसर होता है।
इस धर्म सम्मेलन में मंच पर प्रयागराज से पधारे जगतगुरु श्री मुक्तिनाथ स्वामी जी महाराज, उद्धव प्रपन्नाचार्य स्वामी जी महाराज एवं अन्य संत महात्माओं ने भी अपने उपदेश से लोगों को लाभान्वित किया। धर्म सम्मेलन में प्रसिद्ध भजन गायको के द्वारा भजन का भी गायन किया गया जिसमें बिहार के मशहूर भोजपुरी गायक भी शामिल हुए।




















