
अब महज 2 से 3 घंटे में होगा रक्सौल से काठमांडू का सफर, नेपाल बेहतर कनेक्टिविटी hogi
रक्सौल–काठमांडू नई रेललाइन बन जाने से भारत और नेपाल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होगी
रिपोर्ट सुजीत कुमार
• महज 2 से 3 घंटे में होगा रक्सौल से काठमांडू का सफर
• दिल्ली से काठमांडू सीधे तौर पर जुड़ जाएगा
• व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
• रक्सौल को मिलेगी विशेष पहचान
रक्सौल-काठमांडू नई रेल परियोजना (लगभग 136 किमी) भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों में गेम-चेंजर साबित होगी। यह लाइन काठमांडू को सीधे भारत से जोड़कर यात्रा समय को 5 घंटे से घटाकर लगभग 3 घंटे कर देगी, जिससे पर्यटन, आर्थिक विकास और सीमा पार व्यापार (विशेषकर वीरगंज कॉरिडोर) में बड़ा उछाल आएगा।
रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन के मुख्य लाभ:
तेज और सुलभ यात्रा: रक्सौल से काठमांडू का सफर, जो अभी लगभग 5-6 घंटे लेता है, वह 3 घंटे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा, जो यात्रा को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाएगा।
आर्थिक और व्यापारिक मजबूती: भारत और नेपाल के बीच वस्तुओं का आयात-निर्यात (Trade) सरल और सस्ता होगा, जिससे सीमा पार व्यापार बढ़ेगा।
पर्यटन को बढ़ावा: बिहार के रास्ते काठमांडू, पोखरा, पशुपतिनाथ और मुक्तनाथ जैसे धार्मिक स्थलों तक भारतीय पर्यटकों की पहुंच आसान होगी, वहीं नेपाल से तीर्थयात्री आसानी से भारत के बोधगया व अन्य तीर्थों तक आ सकेंगे।
दिल्ली-काठमांडू सीधी कनेक्टिविटी: रक्सौल के पहले से दिल्ली से जुड़े होने के कारण, यह रेल लाइन भारत की राजधानी दिल्ली को सीधे नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ देगी, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी।
स्थानीय रोजगार: निर्माण के दौरान और चालू होने के बाद क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
बुनियादी ढांचा विकास: इस 25,000 करोड़ रुपये की परियोजना में 13 स्टेशन, 32 ओवरब्रिज और 53 अंडरपास शामिल हैं, जो पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाएंगे।
रक्सौल-काठमांडू नई रेल लाइन परियोजना का फाइनल सर्वे (Final Location Survey) काम दिसंबर 2025 तक पूरा हो चुका है और इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) इस वर्ष तक तैयार होने की उम्मीद है।
136 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉडगेज लाइन काठमांडू को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, जिसमें 13 स्टेशन होंगे।
परियोजना की मुख्य बातें (अपडेट 2026):
सर्वेक्षण की स्थिति: कोंकण रेलवे द्वारा किया जा रहा अंतिम सर्वे पूरा होने के करीब है।
अगला कदम: जनवरी 2026 में DPR फाइनल होने के बाद भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।
कोंकण रेलवे सर्वेक्षण का काम 80% से अधिक कर चुका है। मालूम हो कि वर्ष 2021 में इस लिंक रेल लाइन की केंद्र सरकार ने स्वीकृति दी थी। यह ट्रैक विद्युतीकृत होगा। कार्य पूरा करने से संबंधित जानकारी पूमरे के कंस्ट्रक्शन विभाग के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट से हुई है।
रक्सौल-काठमांडू के बीच होंगे 13 स्टेशन
रूट: रक्सौल (भारत) -> वीरगंज -> जीतपुर -> निजगढ़ -> शिखरपुर -> सिसनेरी -> सतीखेल -> चोभर (काठमांडू)।
परियोजना के तहत रक्सौल से काठमांडू के बीच 13 स्टेशन होंगे। वर्ष 2023 में कराए गए पहले सर्वे में रक्सौल-काठमांडू लिंक रेल लाइन पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना जताई गई थी। अब अंतिम डीपीआर तैयार होने पर परिजयोजना की लागत थोड़ी बढ़ेगी। इस परियोजना के पूरा होने पर नई दिल्ली से नेपाल का काठमांडू रेलमार्ग से जुड़ जाएगा।
2022 में रेलमार्ग की शुरू हुई थी कवायद :
दिल्ली से काठमांडू को रेलमार्ग से जोड़ने की कवायद 2022 में शुरू हुई थी। रक्सौल-काठमांडू की दूरी 136 किमी है। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में पांच घंटे से अधिक लगते हैं। रेलमार्ग से यह दूरी दो-तीन घंटे में पूरी होगी। दिल्ली से रक्सौल तक रेलवे लाइन है। इसके निर्माण से दिल्ली से काठमांडू सीधा जुड़ जाएगा।
यह परियोजना सामरिक दृष्टिकोण से भारत-नेपाल संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी और चीन के प्रभाव को संतुलित करने में सहायक होगी।




















