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आस्था और प्रेम की रंगोली बनाकर शतकवीर बाबा का मना जन्मदिन

आस्था और प्रेम की रंगोली बनाकर शतकवीर बाबा का मना जन्मदिन

रिपोर्ट चारोधाम मिश्रा 

पटना (बिहार)आज के परिवेश में एक सौ वर्ष पूर्ण कर चुके लोगों की संख्या काफी कम है। यदि है भी तो परिवार,समाज एवं राष्ट्र के लिए काफी उपयोगी हैं।इसी कड़ी के रूप में एक सौ वर्ष का वसंत देख चुके मन, कर्म और वचन के पक्के शतकवीर के नाम से विख्यात श्री उपेन्द्र मोहन मिश्र जी जिन्हें परिवार,समाज और क्षेत्र के लोग अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।

उनका जन्मदिन सुपौत्र श्री चंदन कुमार मिश्र जो भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं वे पटना स्थित आवास पर आस्था और प्रेम की रंगोली बनाकर पति- पत्नी संग अपने शतकवीर बाबा का मनाया। कहते हैं चंदन को ललाट का चंदन बनाने में शतकवीर बाबा का अहम योगदान है।

अपने परिश्रम, सेवा और समर्पण के बल पर अभाव में रहते हुए नवादा जिला के मेसकौर प्रखंड अंतर्गत बड़ोसर पंचायत के अरण्यडीह गांव निवासी शतकवीर बाबा ने एक सौ पचास सदस्यों वाली परिवार के साथ – साथ गांव के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

अपने गांव स्थित जर्जर मंदिर को लोगों के सहयोग प्राप्त कर गगनचुंबी मंदिर का स्वरूप प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन किया है। गांव के लोगों की समस्या को चुटकी में समाधान कर देना कोई बाबा से सीखे।

अपने गांव ही नहीं बल्कि प्रखंड स्तर पर बाबा से अधिक उम्र का कोई नहीं है बल्कि सबसे अधिक उम्र के बाबा हैं। बाबा के पारिवारिक सदस्यों में सरस्वती, लक्ष्मी का साक्षात निवास है और इसके पीछे बाबा का परिश्रम, समझदारी एवं समर्पण है।

इनके पारिवारिक सदस्यों में तीन सुपौत्र आई.आई. टी,एन. आई.टी कर सेवारत हैं जबकि तीन सुपौत्र,एक नाती भारतीय रेलवे में जबकि एक नतीनी बिहार पुलिस में चयनित होकर राजधानी पटना के शास्त्री नगर थाना में कार्यरत है।एक सुपौत्री उच्च कोटि के लेखिका हैं जिनके कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।

बाबा शतकवीर होने के बाद पूर्णतः स्वस्थ हैं और अभी भी अकेले धार्मिक यात्राओं में भ्रमण करते रहते हैं।इनका ससुराल पक्ष भी शिक्षा क्षेत्र में चर्चित रहा है। इनके ससूर आयुर्वेद के जाने-माने चिकित्सक थे जबकि साला विनोबा भावे विश्वविद्यालय में गणित के प्राध्यापक रहें।

इनके चारों सरबेटा में सबसे बड़ा सरबेटा डा.विजय कुमार मिश्र हृदय रोग विशेषज्ञ (एमबीबीएस,एमडी),दूसरा डा.विनय कुमार मिश्र,वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा में भौतिकी के प्राध्यापक, तीसरा डा.बिमल कुमार मिश्र विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में रजिस्टार के साथ – साथ राजधनवार महाविद्यालय, कोडरमा में प्राध्यापक हैं।

जबकि चौथा सरबेटा हजारीबाग स्थित अमन विद्या शिक्षा संस्थान के संचालक हैं। वहीं इनके साथ पुत्रों में सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं में अपनी सेवा दे रहे हैं।

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