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बेल्ट्रॉन के कार्यकलापों से आख़िर क्यों नाराज़ हैं? बिहार के बेरोजगार परीक्षार्थीगण, उनकी व्यथा कथा सुन हो जायेंगे दंग 

बेल्ट्रॉन के कार्यकलापों से आख़िर क्यों नाराज़ हैं? बिहार के बेरोजगार परीक्षार्थीगण, उनकी व्यथा कथा सुन हो जायेंगे दंग

बेल्ट्रॉन विभाग चुप क्यों ? नोटिस जारी कर दे ज़बाब, परिक्षार्थियों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़

रिपोर्ट अरविंद वर्मा 

पटना। आखिर बेल्ट्रॉन के कार्य कलापों से क्यों नाराज़ हैं बिहार के बेरोजगार परीक्षार्थीगण ? आईए इस संदर्भ में आपको विस्तृत जानकारी दे रहे हैं सिमरी बख्तियारपुर के भुक्तभोगी एवं पीड़ित परीक्षार्थी जसवीर यादव।

उन्होंने मीडिया से कहा हमलोगों के साथ बहुत अन्याय हुआ है, जिसकी विस्तार से जानकारी इस प्रकार है – बेल्ट्रॉन द्वारा जारी पत्रांक (नोटिफिकेशन) सं-678/2024 में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि जिसका CBT में 30 अंक तथा अंग्रेजी टाइपिंग में 30 WPM या हिंदी में 25 WPM होगा, उसका पैनल तैयार किया जाएगा।

2019 के परीक्षा में जिन्होंने इस क्राइटेरिया को पूरा किया, उनका पैनलनोटिफिकेशन के अनुसार ही तैयार किया गया था और फाइनल लिस्ट में शामिल किया गया था, जिसमें CBT अंक, हिंदी टाइपिंग और अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड भी दर्शाए गए थे।

लेकिन इस बार ऐसा क्यों नहीं किया गया? इस बार क्राइटेरिया पूरा करने वाले छात्रों को केवल “Qualified” घोषित किया गया — ऐसा क्यों? नोटिफिकेशन सं-678/2024 के अनुसार जो छात्र CBT, हिंदी टाइपिंग और अंग्रेजी टाइपिंग — तीनों में या सिर्फ अंग्रेजी टाइपिंग में Qualified हैं।

उन्हें Provisional लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा क्यों नहीं किया गया, जबकि सीट की कोई सीमा (limit) नहीं थी? टाइपिंग में हमारे अंकों को कैसे और क्यों घटाया गया।

इसकी कोई जानकारी अब तक हम छात्रों को क्यों नहीं दी गई? जब Vacancy का नोटिफिकेशन सं-678/2024 निकाला गया था, तो उसमें Normalization का कोई ज़िक्र क्यों नहीं था? परीक्षा के बाद Normalization क्यों किया गया — जो कानून के बिल्कुल खिलाफ है!

जिसमें CBT के अंक बढ़ा दिए गए और टाइपिंग में अंक (WPM) घटा दिए गए। सच तो यह है कि आज तक दुनिया में किसी भी टाइपिंग परीक्षा में टाइपिंग के लिए Normalization नहीं किया गया है।

फिर बेल्ट्रॉन में ऐसा क्यों किया गया? यदि अंग्रेज़ी टाइपिंग के अभ्यर्थियों को इस चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं करना था, तो फॉर्म में अंग्रेज़ी टाइपिंग के विकल्प पर आवेदन क्यों करवाया गया? फॉर्म में तीन विकल्प दिए गए थे:

(i) केवल अंग्रेज़ी टाइपिंग चुनें

(ii) केवल हिंदी टाइपिंग चुनें

(iii) हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों टाइपिंग चुनें। इतना सब होने के बावजूद बेल्ट्रॉन विभाग चुप क्यों है? कोई नोटिस जारी करके जवाब क्यों नहीं दे रहा, जबकि हम सभी छात्र 1000 से अधिक आवेदन, ईमेल, RTI, हज़ारों से भी ज़्यादा छात्र दो बार पटना में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। यह बात पूरे मीडिया में फैल चुकी है।

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