काम के दबाव और शो-कॉज के तनाव ने ली जान: विभूतिपुर के किसान सलाहकार चंद्रिका प्रसाद का निधन

काम के दबाव और शो-कॉज के तनाव ने ली जान: विभूतिपुर के किसान सलाहकार चंद्रिका प्रसाद का निधन
राम कुमार ब्यूरो प्रमुख समस्तीपुर
समस्तीपुर । जिले के विभूतिपुर प्रखंड क्षेत्र के महथी दक्षिण पंचायत के सीरसी (वार्ड 6) निवासी 50 वर्षीय किसान सलाहकार चंद्रिका प्रसाद सिंह ‘अनल’ का गुरुवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है, वहीं विभाग की कार्यशैली को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों और परिजनों के बीच यह चर्चा का विषय है कि विभाग द्वारा काम के अत्यधिक दबाव और हाल ही में मिले शो-कॉज (स्पष्टीकरण) नोटिस के कारण वे गहरे मानसिक तनाव में थे, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।
क्या है पूरा मामला
दिवंगत चंद्रिका प्रसाद सिंह वर्ष 2011 से किसान सलाहकार के पद पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि वे पिछले एक माह से अस्वस्थ चल रहे थे। इसके बावजूद, विभाग की ओर से ‘फार्मर रजिस्ट्री’ के लक्ष्य को पूरा करने का उन पर भारी दबाव था।

इसी कड़ी में बुधवार को प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) धीरज कुमार ने कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक कृषि समन्वयक और 6 किसान सलाहकारों से स्पष्टीकरण मांगा था। जारी पत्र में चंद्रिका प्रसाद सिंह का नाम तीसरे स्थान पर था।
नोटिस की मुख्य बातें
- शून्य प्रगति: पत्र में उल्लेख था कि 25 फरवरी 2026 को उनके द्वारा ‘शून्य’ फार्मर रजिस्ट्री की गई।
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दैनिक लक्ष्य: विभाग ने प्रतिदिन कम से कम 5 रजिस्ट्री का लक्ष्य तय किया था।
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चेतावनी: 24 घंटे के भीतर जवाब न देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और वेतन रोकने की अनुशंसा की बात कही गई थी।
नोटिस मिलते ही बिगड़ी स्थिति
परिजनों के अनुसार, बुधवार को जैसे ही चंद्रिका प्रसाद को इस नोटिस की जानकारी मिली, वे गहरे सदमे में चले गए और उनकी स्थिति गंभीर हो गई। उन्हें तुरंत दलसिंहसराय के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति में सुधार न होने पर गुरुवार को उन्हें समस्तीपुर ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गाँव में पसरा सन्नाटा, नम आंखों से दी गई विदाई
मौत की खबर मिलते ही सीरसी गाँव में कोहराम मच गया। मृतक अपने पीछे पत्नी निर्मला देवी, वृद्ध माता चंद्रकला देवी, दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। गुरुवार को सिंघिया घाट स्थित बूढ़ी गंडक नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़े पुत्र सत्यार्थ कुमार ने उन्हें मुखाग्नि दी।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया
शोक की इस घड़ी में बीडीओ सुनील कुमार, बीएओ धीरज कुमार समेत कई अन्य अधिकारियों और सहयोगियों ने उनके अंतिम दर्शन कर शोक संवेदना व्यक्त की। हालांकि, जब इस मामले और कार्य के दबाव को लेकर बीएओ धीरज कुमार से बात करने की कोशिश की गई, तो एक बार फोन रिसीव होने के बाद दोबारा उनसे संपर्क नहीं हो सका।
यह घटना सिस्टम में “वर्क प्रेशर” और “मानसिक स्वास्थ्य” के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।




















