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तत्कालीन बलुआ इंस्पेक्टर अतुल कुमार निर्दोषों को फंसाया, जेल भेजा और घोषित कराया 50 हजार का इनाम

चंदौली के बलुआ में तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल प्रजापति द्वारा निर्दोषों को फर्जी मुकदमे में फंसाने और उन पर इनाम घोषित करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित विकास सिंह ने अब मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल प्रजापति की साजिश

निर्दोष विकास सिंह पर फर्जी इनाम

तीन महीने तक काटी जेल की सजा

मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच

बाहुबली आरोपियों से जान का खतरा

चंदौली जिले के बलुआ थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है।  ग्राम सराय निवासी विकास सिंह ने तत्कालीन थाना प्रभारी अतुल प्रजापति (अतुल कुमार) पर अत्यंत गंभीर और अनैतिक आरोप लगाए हैं।  मामला 21 दिसंबर की रात का है, जब नौशाद अली उर्फ खुशबू किन्नर के घर पर एक संदिग्ध विस्फोट हुआ था।  इस घटना के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए विकास सिंह और उनके परिवार के सदस्यों को बिना किसी ठोस साक्ष्य के फर्जी मुकदमे में नामजद कर दिया।

तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल प्रजापति का कारनामा
पीड़ित विकास सिंह के अनुसार, तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल प्रजापति ने न केवल उन्हें फर्जी तरीके से जेल भेजा, बल्कि पूरी तरह निर्दोष होते हुए भी उन पर 5000 रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।  विकास का आरोप है कि रिमांड के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और जबरदस्ती पुल के नीचे ले जाकर मनगढ़ंत बरामदगी दिखाई गई।

तत्कालीन थाना प्रभारी ने राजनीतिक प्रभाव और निजी स्वार्थ के चलते निर्दोषों को अपराधी साबित करने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़े, जिससे विकास के छोटे भाई और बड़े भाई मनोज सिंह को भी महीनों जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े।  यह एक वर्दीधारी द्वारा किया गया घोर अनैतिक कृत्य था, जिसने कई परिवारों की मान-प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला दिया।

CM की जांच में हुआ दूध का दूध और पानी का पानी
जब पीड़ित की माता ने प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई, तो शासन स्तर पर एक जांच टीम गठित की गई।
जौनपुर की टीम द्वारा की गई निष्पक्ष जांच में यह सच्चाई सामने आई कि यह पूरा प्रकरण एक गहरा षड्यंत्र था।  जांच में पाया गया कि नौशाद अली उर्फ खुशबू किन्नर ने धीरेंद्र सिंह अंकित, बाबूलाल विश्वकर्मा और मदन सिंह मुनमुन के साथ मिलकर विकास सिंह को फंसाने की योजना बनाई थी, जिसमें तत्कालीन इंस्पेक्टर ने भी संदिग्ध भूमिका निभाई।  सच्चाई सामने आने के बाद खुशबू किन्नर को तो जेल भेज दिया गया, लेकिन अन्य प्रभावशाली आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

न्याय की गुहार और सुरक्षा का संकट 
जेल से बाहर आने के बाद भी विकास सिंह और उनका परिवार दहशत में है।  विकास ने बताया कि धीरेंद्र सिंह अंकित एक बाहुबली किस्म का व्यक्ति है और उसे डर है कि बाहर निकलने पर उसकी या उसके परिवार की हत्या कराई जा सकती है।  हालांकि, विकास ने चंदौली के वर्तमान एसपी (कप्तान साहब) की सराहना की है, जिन्होंने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया है और मामले में मदद कर रहे हैं।

पीड़ित का कहना है कि जब तक तत्कालीन इंस्पेक्टर के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होती और सभी दोषी सलाखों के पीछे नहीं जाते, तब तक उन्हें पूर्ण न्याय नहीं मिलेगा।  पीड़ित परिवार अब शासन-प्रशासन से मांग कर रहा है कि उन पर लगे दाग को पूरी तरह धोया जाए और दोषियों को उनके किए की सजा मिले।

हालांकि नए पुलिस कप्तान आकाश पटेल ने मामले में कार्रवाई के साथ-साथ सराय निवासी विकास सिंह की सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। विकास सिंह का कहना है कि जिस तरह से नए पुलिस अधीक्षक ने बात सुनी है और कार्रवाई की बात कही है, उससे लगता है कि न्याय मिलेगा और तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल कुमार पर कार्रवाई होगी।

 

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