
अंजबित सिंह महाविद्यालय में बॉटनी विभाग का उन्मुखीकरण कार्यक्रम, प्राचार्य ने नियमित कक्षा और अनुशासन पर दिया जोर
छात्रों को CBCS प्रणाली की जानकारीसी, स्वच्छता अभियान और पौधरोपण भी हुआ
रोहतास संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट
बिक्रमगंज (रोहतास) अंजबित सिंह महाविद्यालय के बॉटनी विभाग में सत्र 2026-30 के स्नातक सेमेस्टर-1 के छात्रों के लिए रविवार को उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष *डॉ. कन्हैया सिंह* ने की।
नियमित कक्षा से ही बढ़ेगा ज्ञान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि “ज्ञान कदम-कदम पर बढ़ता है, छलांग मारकर नहीं। आप नियमित क्लास करेंगे तो आपके ज्ञान में उत्तरोत्तर वृद्धि होगी और ज्ञानमूलक समाज के निर्माण में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।”
उन्होंने कहा कि नियमित कॉलेज आने से बच्चे ज्यादा सीखते हैं और पाठ्य सहगामी क्रियाओं में भाग लेने का मौका मिलता है। आज के सामाजिक परिवेश में ज्ञान ही शक्ति है। इसलिए सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में शिक्षक और छात्रों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।
प्राचार्य ने दी अनुशासन और पुस्तकालय उपयोग की सीख
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश राम ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी छात्र-छात्राएं नियमित रूप से कक्षा आएं और अनुशासन में रहकर ज्ञानार्जन करें।
प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय में पठन-पाठन की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। छात्र कक्षा के बाद भी पुस्तकालय में बैठकर स्वयं अध्ययन कर सकते हैं। महाविद्यालय आने से आपका चहुंमुखी विकास होगा।
CBCS और क्रेडिट सिस्टम की दी गई जानकारी
कार्यक्रम का संचालन करते हुए बॉटनी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शशि भूषण ने छात्रों को CBCS कोर्स और पाठ्यक्रम से संबंधित मूलभूत जानकारी दी। उन्होंने CBCS प्रणाली में क्रेडिट सिस्टम के बारे में भी विस्तार से बताया। इसके बाद सभी छात्रों ने एक-एक कर अपना परिचय दिया।
स्वच्छता अभियान और पौधरोपण
इस अवसर पर इको क्लब के माध्यम से छात्र-छात्राओं द्वारा “स्वच्छ परिसर और स्वस्थ परिसर” अभियान चलाया गया। अभियान के तहत परिसर में प्लास्टिक की बोतलों को एकत्र कर उसे उचित स्थान पर डंप किया गया। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ सभी बच्चों को एक-एक पौधा गोद लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राएं अत्यंत उत्साहित दिखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो. फजल अहमद, डॉ. रविकांत पाण्डेय और प्रो. सुकेश्वर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



















