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अंग्रेजी नव वर्ष का स्वागत करते हुए लोगों ने हर्षोल्लास पुर्वक मनाया पिकनिक

जमुई / सोनो संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट 

 सोनो मे लोगों ने अपने सभी गिले सिकवे को भुलाकर पुराने साल की विदाई ओर अंग्रेजी नव वर्ष 2025 का स्वागत पिकनिक के साथ बड़े ही हर्षोल्लास पुर्वक किया ।

इस नये साल के उपलक्ष्य पर हर वर्ष की भॉंति इस वर्ष भी पिकनिक स्पॉटों मे पंचपहड़ी , बरनार जलाशय परियोजना के समीप स्थित पहाड़ी पर , सोनो चकाई मुख्य मार्ग स्थित चिरैन पुल , गोंती नदी , झांझी नदी, विभिन्न तालाबों सहित बरनार नदी के विभिन्न स्पॉटों पर बड़ी तायदाद मे लोगों ने अपने परिजनों तथा दोस्तों के साथ खुशियों के साथ पिकनिक मनाया ।

इस मौके पर मुर्गा , मछली ओर मांसु सहित हरी सब्जियों की दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ लगी रही ।

ज्ञात हो कि वसुंधरा कुटुंबकम की भावना से हम नये साल का स्वागत इसलिए करते हैं कि पुरी पृथ्वी पर रहने वाले सभी व्यक्ति एक ही परिवार के लोग हैं ।

यहाँ पर अंग्रेजी संस्कृति को अपनाने की बात सिर्फ इसलिए होता है कि हमारे भारत के लोगों द्वारा व्यवसाईक , बेंक प्रणाली एवं विधालयों मे अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से वर्ष भर का गणना किया जाता है , जिस कारण हम नये साल का वेलकम करते हैं ।

लेकिन जब सनातन धर्म , व्रत ओर त्योहार मनाने के लिए तिथि की गणना का समय आती है तो हम सनातनी पंचाग के अनुसार ही इसकी गणना करते हैं , ओर इसी पंचाग के अनुसार हमे चलना पड़ता है ।

इसलिए हमे हमारे सनातनी धर्म को भुलाकर आगे नहीं चलना चाहिए । क्योंकि हम सभी देशवासी हिन्दुस्तानी हें लिहाजा हमे इस बात पर बहुत ज्यादा गर्व होना चाहिए ।

बताते चलें कि एक जनवरी केवल एक कृत्रिम तारीख हे , जिसका हमारे धर्म से ओर ना ही प्रकृति से कोई लेना देना नहीं है ।

यह दिन ठंड ओर शुन्यता का प्रतिक है एवं हमारे ऋतुचक्र ओर हमारे जीवन चक्र से पुरी तरह कटे हुए पश्चिमी उपभोगवाद का प्रतीक है ।

यह दिन उस ग्रेगोरियन कैलेंडर का हिस्सा है जिसे औपनिवेशिक शासकों ने हम पर थोपा । यह दिन हमारी संस्कृति के विनाश का पहला कदम था जब अंग्रेजो ने हमारी जड़ों को उखाड़ने का प्रयास किया ।

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