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बिहारराज्यरोहतास

मूल्यहीनता की स्थिति, खोखला होता समाज: डॉ अखलाख अहमद

रोहतास दावथ संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट 

 बिक्रमगंज (रोहतास) सामाजिक विकास के क्रम में हम सुशासन से नागरिक समाज की ओर बढ़ रहे हैं | प्राकृतिक अवस्था में उत्पन्न समस्याओं का निदान आरम्भ में सिविल सोसायटी की अवधारणा में ही दिखी किन्तु वर्तमान भौतिकवादी युग में आदर्श, मूल्य, नैतिकता,आचार की अनदेखी से एक बड़ा खोखलापन सामने आया है |

विद्वानों की इस समस्या पर नज़र सदा से रही है | वर्तमान का पतित होता समाज उनकी चिंता को और बढ़ा देता है |

भारत में शिक्षाविद इसे बखूबी समझते है ,तभी तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में नैतिकता, कर्तव्य,मूल्य एवं आचार शास्त्र के साथ रचनात्मकता को केंद्र में लाने का प्रयास किया जा रहा है , यह मूल्यों के प्रति हमारी चिंता को दर्शाता है |

गाँधी दर्शन पूर्व का एक ऐसा सशक्त हथियार है जहाँ पश्चिम के बड़े से बड़े दार्शनिक नतमस्तक हो जाते हैं | यहाँ गाँधी दर्शन की चर्चा अनावश्यक नहीं वरन् समाधानात्मक है | मै साध्य एवं साधन की पवित्रता पर ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ |

गाँधी ने स्पष्टतः कहा है कि यदि साधन अपवित्र हो तो साध्य पवित्र नहीं हो सकता | अभी हाल ही में लोकसभा चुनाव हुआ, क्या यह चुनाव जनहित के मुद्दे पर लड़ा गया ? ये सवाल मै आप सभी के विचारणीय प्रस्तुत कर रहा हूँ |

राजनीति विज्ञान का छात्र होने के नाते डाटा एनालिसिस पर खास ध्यान रखना पड़ता है, ताकि मानव व्यवहार का सटीक विश्लेषण कर भविष्यवाणी करके विषय की वैज्ञानिकता को प्रमाणित किया जा सकें , किन्तु एग्जिट पोल का गलत होना हमे फिर विचार करने पर बाध्य करता है कि राजनीति विज्ञान तो है ही नहीं कलाओं में भी सबसे पिछड़ी हुई कला है |

यदि हमारे अध्ययन के टूल्स सही है तो फिर एग्जिट पोल करनेवाले के नियत, नियति एवं नैतिकता पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता हुआ दिखाई देता है |

अपने कर्तव्यों से विमुखता, व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति हेतु साधन की परवाह न करना, राष्ट्र एवं समाज के हितों पर अपनी व्यक्तिगत स्वार्थ पूर्ति को प्राथमिकता देना कही न कही समाजीकरण पर प्रश्न चिन्ह लगाता है, जिससे मानव नहीं दानव की उत्पति हुई है |

कुछ तथ्यों की बात करे, यदि मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाया जाए तो पूरे देश में पिछले 5 वर्षों में 41 परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक हुए जिससे लगभग 2 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं |

ये कैसी व्यवस्था, कैसे लोग,कैसी सामाजिकता, कैसा शासन? ऐसा मालूम पड़ता है कि हाब्स की प्राकृतिक अवस्था का परिष्कृत रूप की भयावहता सामने हो,

फर्क सिर्फ यह है कि रक्त रंजित एवं क्षणिक समाज न होकर यहाँ स्थायी एवं आर्थिक रूप से सबल लोगों को ही जीने का अधिकार है , संघर्ष तो यहाँ भी सबका सबके साथ है लेकिन रूप बदल गया है, अब यह आर्थिक हो गया है |

इन तथ्यों को प्रमाणित करने की भीं आवश्यकता है | 5 मई 2024 को मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए एक बड़ी परीक्षा पूर्व की भांति आयोजित की गयी |

परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी एनटीए अर्थात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है | परिणाम 14 जून को प्रस्तावित था किन्तु 4 जून को उस समय जब लोकसभा के चुनाव परिणाम आनेवाले थे घोषित किया गया |

लोगों का ऐसा मानना है कि यह दिन खासकर चुना गया ताकि मीडिया तव्वजों न दे सके किन्तु सोशल मीडिया ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े ही प्रभावशाली तरीके से उठाया | 24 लाख बच्चों के भविष्य का सवाल है | एनटीए द्वारा आयोजित एवं परिणाम जारी करने तक इस परीक्षा में अनेकों खामियां सामने आयी|

718 ,719 अंक दिए गए जो असंभव है | 67 बच्चें टॉप कर गए | एक ही सेंटर से 6 बच्चें टॉपर है | सबसे बड़ी बात तो यह है कि एनटीए हर सवाल का दिग्भ्रमित करने वाला जवाब देता रहा |

718 ,719 अंक के मामले में ग्रेस की बात की गयी किन्तु सर्वोच्च न्यायलय में एनटीए ने अपनी ग्रेस पद्धति को स्वतः गलत माना, जिसे वह पूर्व में लिखित रूप में यह प्रमाणित किया कि सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय के आलोक में ऐसा किया गया |

उल्लेखनीय है कि मामला अति संवेदनशील है, सवाल 24 लाख ही नहीं सवा करोड़ परिवार जनों का है | इन्टर के बच्चे-कच्चे होते है, इनके तो जूते भी माँ-बाप पोलिस करके देते है|

इनके मनःस्थिति पर इतने बड़े भ्रष्टाचार का गहरा असर पड़ेगा | इस संस्था ने विश्वास तोड़ा है, बच्चे सड़क पर है , सरकार लगातार अपने स्टेटमेंट बदल रही है | अंततः शिक्षा मंत्री ने माना कि एनटीए में सुधार की आवश्यकता है |

डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है, यदि इनके दाखिले में ईमानदारी एवं पारदर्शिता नहीं रही तो समझ लीजिए भविष्य में हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसे लोगों के हाथ में चली जाएगी जो बड़े से बड़े अनैतिक कार्य करने में संदेह नहीं करेंगे |

इसका दूसरा पक्ष जो वास्तविक दावेदार है उनका इस व्यवस्था से विश्वास उठ जायेगा |

अफ़सोस बच्चें-अभिभावक सड़क पर संघर्ष उस चीज के लिए कर रहे है जो उन्हें स्वतः मिलना चाहिए, हद है सरकार खामोश है |

इस परीक्षा का एक पक्ष पेपर लीक से भी जुड़ता है, सॉल्वर गैंग भी सहभागी है ,आश्चर्य तो यह है कि हजार किलोमीटर दूर दुसरे स्टेट में बच्चे परीक्षा देना पसंद कर रहें है|

बहुत झोल है लेकिन सरकार निष्क्रिय है | विपक्ष सवाल जरुर उठा रहा है किन्तु मामले के राजनीतिकरण से बचना होगा |

नीट के इतिहास में रैंक में इतना इन्फलेसन कभी नहीं आया | 600 से अधिक अंक लानेवाले को सरकारी कॉलेज आसानी से मिल जाता था, पिछला साल 605 के आस –पास कट रहा है।

इस बार 650 पर भी सामान्य वर्ग को सरकारी कॉलेज नहीं मिलेगा | कारण स्पष्ट है बहुत सारी अनियमितता हुई है | शिक्षाविदों का मानना है कि पेपर आसान नहीं था |

उल्लेखनीय है कि अंकों का इन्फलेसन सिर्फ 620-720 के बीच है ,सेलेक्शन यहीं से होता है | 520 से 620 के बिच इन्फलेसन नहीं है | यहाँ एक बड़ा प्रश्न है कि क्या इस देश में गरीब के मेधावी बच्चों को डॉ बनने का हक नहीं है ?

आज चाहे संसद का यह कहना कि अमुक जाति एवं धर्म के लोग हमारे पास नहीं आये क्यूकि आपने मुझे वोट नहीं दिया है एवं अभिभावक – छात्रों का सड़क पर संघर्ष हमारे सिस्टम से उठता विश्वास ही नहीं वरन् नैतिक क्षरण का भी उदहारण है , जिसपर चिंतन की नितांत आवश्यकता है |

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