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भगवान विश्वकर्मा की पुजा हर्षोल्लास पुर्वक संपन्न

सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट 

श्रृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र व लौह निर्माण का देवता भगवान विश्वकर्मा की पुजा सोनो प्रखंड छेत्रों मे मंगलवार को हर्षोल्लास पुर्वक संपन्न हो गया है ।

सोनो , बटिया , डुमरी , सरधोडीह आदि विभिन्न गाँवो में सुसज्जित लाईटिंग के साथ सजाये गये पंडालों मे लौह शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की मुर्ति को रखकर विद्वान पंडितों के द्वारा विधिवत पुजा अर्चना के बाद प्रसाद वितरण की गई ।

इसके अलावा गैरेजों , वाहन चालकों , इलेक्ट्रॉनिक की दुकानों आदि लोह उपकरण के सभी व्यवसाईयों ने अपने अपने प्रतिष्ठानों पर लोह शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पुजा अर्चना की ।

विश्वकर्मा पुजा के शुभ उपलक्ष्य मे कई पुजा पंडालो पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने देर रात तक आनंद लेते रहे । पुजा को लेकर लोगों के द्वारा डीजे लगाकर दिनभर भक्ति गीत प्रस्तुत करते रहे ।

इस भक्ति गीतों की गुंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा । माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए महलों , हथियारों ओर इमारतों का निर्माण किए थे ।

जिस कारण विश्वकर्मा जयंती के शुभ मौके पर लोहे से बनी ओजारों , मशीनरी , कल पुर्जे ओर हथियारों आदि की साफ सफाई कर इसकी पुजा हर्षोल्लास पुर्वक एवं पुरे विधि विधान के साथ किया जाता है ।

मान्यता है कि रावण की लंका , पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ एवं भगवान श्रीकृष्ण के लिए द्वारका का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी ने किया था ।

साथ ही यमराज का कालदंड , भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र , भगवान शिव का त्रिशूल एवं पुष्पक विमान सहित बड़ी संख्या में अस्त्र सस्त्र ओर उपकरणों का निर्माण किए थे । जिस कारण भगवान विश्वकर्मा को यंत्र , औजार ओर उपकरणों का देवता माना जाता है ।

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