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गठबंधन ने सबकी बलि माँगी है: राकेश रौशन

सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट 

लोजपा रामविलास से इस्तीफा देने की घोषणा के बाद युवा नेता राकेश रौशन ने आज मौर्या होटल पटना में प्रेस वार्ता की । इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार और मीडिया साथी उपस्थित थे ।

प्रेस वार्ता के दौरान राकेश रौशन ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से आगामी चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में खड़े होने का निर्णय लेते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है।

अपने साथ 28 हजार स्नातकों का समर्थन जुटाकर उन्होंने इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है और अब हैरान कर देने वाले नतीजे की भी उम्मीद जनता ने बांध ली है ।

श्री रौशन ने बताया की पिछले कुछ समय से मैं महसूस कर रहा था कि शिक्षा , स्वास्थ्य , और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर समर्पित और सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता है । गठबंधन की राजनीति के चलते इन महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी काम करना संभव नहीं हो पा रहा था ।

लोजपा रामविलास के अन्य नेताओं के जैसे मेरा सपना भी ‘बिहार फर्स्ट , बिहारी फर्स्ट का है लेकिन मैं मानता हूँ कि इस उद्देश्य को गठबंधन के ढांचे में रहकर पूरा नहीं किया जा सकता । इसी कारण वर्ष 2020 में हमारी पार्टी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़कर अपना वर्चस्व स्थापित किया था ।

उन्होंने गठबंधन की राजनीति के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस राह में कई कार्यकर्ताओं और नेताओं का नुकसान हुआ है ।

उदाहरण के तौर पर रूपौली विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के प्रमुख नेता शंकर सिंह को निर्दलीय चुनाव लड़ने पर मजबूर होना पड़ा और उनकी जीत के बाद उन्हें जेडीयू में शामिल होना पड़ा । गठबंधन ने कई बलि ली है और अभी कई बलि आने वाले चुनाव में ली जाएगी ।

मैं वीर का बेटा हूँ लड़ते लड़ते मरना पसंद करूँगा ना की बलि चढ़ने का । श्री रौशन ने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं , छात्रों और शिक्षित वर्ग की आवाजों को एक मजबूत राजनीतिक मंच प्रदान करना है ।

मैं चाहता हूँ कि समाज के हर वर्ग का सहयोग मिले ताकि हम प्रगति की दिशा में एक सशक्त सामूहिक कदम उठा सकें ।

ज्ञात हो कि छात्र जीवन से ही लोजपा राम विलास के उपाध्यक्ष एवं आईटीसेल के संस्थापक रहे राकेश रौशन ने तकरीबन पांच हजार से अधिक लोगों को जोड़ने का काम किए । जिन्होंने आज पार्टी की गलत रवैये के कारण नाखुस होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिए ।

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