[wpdts-weekday-name] [wpdts-day]/ [wpdts-month]/ [wpdts-year] 

बैरगनिया में संपूर्णता अभियान 2.0 की शुरुआतआर्थिक रूप से इस नए बजट से लोगों को मिलेगी राहत: डॉ. मनीषपूर्णिया के धरती पर फिरदौस ने लहराया अरवल जिला का परचमभारत लेनिन अमर शहीद जगदेव प्रसाद जी की 104वीं जयंती पर जदयू परिवार ने दी श्रद्धांजलिकेंद्र सरकार के बजट सामने आने के बाद शेयर मार्केट में भारी गिरावट…समानता, सद्भावना और करुणा से समाज को एक सूत्र में बंधने वाले थे संत रविदाससंत रविदास जी हिन्दू समाज के महान स्तंभ थे: चारों धाम मिश्रानई दिल्ली जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं रेलवे संघर्ष समिति के लोगहड़ताल पर गए CO पर सरकार सख्त, ‘नो वर्क नो पे’ से लेकर बंगला खाली कराने तक के संकेतरेलवे संघर्ष समिति बिहटा अरवल एवं औरंगाबाद का आज दिल्ली के जंतर मंतर पर होगा धरना प्रदर्शन
बिहारराज्यरोहतास

कलयुग में राम नाम ही मुक्ति का एकमात्र आधार:- लक्ष्मी नारायण स्वामी जी महाराज

रोहतास दावथ संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट 

दावथ (रोहतास): प्रखंड क्षेत्र के बिठवा गांव के सर्वेश्वर धाम में लक्ष्मी प्रपन्ना जीयर स्वामी जी महाराज के शिष्य लक्ष्मी नारायण स्वामी जी महाराज ने प्रवचन के दौरान श्री राम के नाम की महिमा का वर्णन किया गया।

इस अवसर पर श्री लक्ष्मी नारायण जी ने रामचरित मानस के दोहे कलयुग केवल नाम अधारा,सुमिर सुमिर नर उतरा ही पारा, के अर्थ को बताते हुए कहा कि गोस्वामीजी ने कहा है कि कलयुग में केवल श्रीराम के नाम से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

यहां सघन आधार था वही कलयुग में मात्र राम नाम की महिमा जपने से ही अपने जीवन के उद्देश्य को साकार किया जा सकता है।

जो सच्चे मन से प्रभु का नाम जप लेता है। उसके जीवन की नैया हर मझधार से निकल शांतिपूर्वक आगे बढ़ने लगती है।

उन्होंने कहा कि नाम की महिमा हर युग में महान रही है चाहे नाम प्रह्लाद ने लिया हो चाहे शबरी ने या द्राेपदी सुदामा ने या तुलसी जैसे कितने ही भक्तों ने नाम को सहारा लेकर अपनी नैया को पार लगाया है।

उन्होंने कहा कि कलयुग में श्री राम नाम की महिमा अपार है इसके जाप मात्र से ही मनुष्य अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।जो मनुष्य भौतिक सुख सुविधाओं में लीन होकर ईश्वर को भूल जाता है।उसे अंत में पछताना पड़ता है।

उन्होंने भगवान श्री राम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीराम प्रातः उठकर अपने माता-पिता व गुरुओं के चरण स्पर्श करते थे।

पिता के कहने पर राजपाट त्याग कर ऋषि मुनियों के सानिध्य में चले गए।उन्होंने अपने जीवन में मर्जदा का पालन किया।

इसीलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहलाये। इस अवसर पर कथा का रसास्वादन करने के लिये सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

Check Also
Close