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कौन है चंदौली का हिटलर जो कानून को अपने जेब में रखता है

यही मुख्य कारण हैं जिसके चलते स्थानीय प्रशासन पूरी तरह बौना साबित होता है और बिना ऊपर की हरी झंडी के पहाड़ों की इस खुली लूट को रोक पाना नामुमकिन हो जाता है।

चंदौली / चकिया से इस वक्त की बड़ी खबर बता दें कि पहाड़ों (खनन और वन संपदा) की अवैध तस्करी माफिया, राजनेताओं और भ्रष्ट सरकारी तंत्र के मजबूत गठजोड़ (Nexus) के दम पर चल रही है। स्थानीय पुलिस और वन विभाग के रेंजर चाहकर भी इस पर कार्रवाई नहीं कर पाते, क्योंकि इसके पीछे एक गहरा और व्यवस्थित अंदरूनी राज छुपा होता है।

1. सिंडिकेट और राजनीतिक संरक्षण- बड़े राजनेताओं का हाथ: अवैध खनन और तस्करी का व्यापार करने वाले माफियाओं को सीधे तौर पर प्रभावशाली नेताओं और रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त होता है।

2. फंडिंग का जरिया: यह धंधा राजनेताओं के लिए चुनावी फंडिंग और अवैध कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया बनता है, जिससे माफियाओं को ‘कवच’ मिल जाता है।

3. पुलिस और वन विभाग की लाचारी (अंदरूनी राज)

भ्रष्टाचार और हफ्ता वसूली: सिंडिकेट का पैसा निचले स्तर से लेकर ऊपर के अधिकारियों तक ‘महीने के फिक्स भत्ते’ या ‘सुविधा शुल्क’ के रूप में बंटता है। जो अधिकारी ईमानदार बनना चाहता है, उसका तुरंत ट्रांसफर (तबादला) करा दिया जाता है या उसे किनारे कर दिया जाता है।

सीधे ऊपर से दबाव: जब भी कोई स्थानीय रेंजर या पुलिसकर्मी किसी गाड़ी को पकड़ता है, तो तुरंत किसी रसूखदार राजनेता या आला अधिकारी का फोन आ जाता है। नौकरी बचाने के डर से स्थानीय अमले को पीछे हटना पड़ता है।

तस्करों का हाई-टेक नेटवर्क और मुखबिरीविभाग के अंदर ही मुखबिर: माफियाओं का मुखबिरी तंत्र (Information Network) इतना मजबूत होता है कि रेंजर या पुलिस के निकलने से पहले ही तस्करों को छापेमारी की खबर मिल जाती है।
अवैध चौकियां और गुर्गे: तस्करों के गुर्गे सरकारी दफ्तरों और रास्तों पर नजर रखते हैं। वे वॉकी-टॉकी और कोडेड मैसेज का इस्तेमाल करके ट्रकों का रास्ता बदल देते हैं।

संसाधनों और सुरक्षा की कमीकम जनशक्ति (Staff Shortage): मीलों फैले घने पहाड़ों और जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग के पास बहुत कम रेंजर और गार्ड होते हैं। उनके पास आधुनिक हथियार और गाड़ियां भी नहीं होतीं।

जान का खतरा: तस्करों के पास आधुनिक हथियार, डंपर और बाहुबल होता है। पूर्व में कई ऐसे मामले आए हैं जहां ड्यूटी पर तैनात ईमानदार रेंजरों या पुलिसकर्मियों पर डंपर चढ़ाकर उन्हें मारने की कोशिश किया जाता है ।

कानूनी कमियां और कागजी हेरफेरफर्जी परमिट (Document Fraud): तस्कर वैध खदानों या पट्टों की आड़ में अवैध जगहों से पहाड़ काटते हैं। एक असली रॉयल्टी पर्ची (रसीद) दिखाकर दिनभर में दर्जनों अवैध ट्रक पार करा दिए जाते हैं।

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