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पटनाबिहारराज्य

बिहार के किसी सरकारी दफ्तर में अधिकारी मांगे रिश्वत तो डॉयल करें ये नंबर….

बिहार के किसी सरकारी दफ्तर में अधिकारी मांगे रिश्वत तो डॉयल करें ये नंबर….

रिपोर्ट सुजीत कुमार 

यदि बिहार में किसी सरकारी दफ्तर में आपका काम बिना वजह अटकाया जा रहा हो और बदले में रिश्वत की मांग की जा रही हो, तो चुप रहने की मजबूरी नहीं है। राज्य में इसके लिए बाकायदा एक मजबूत निगरानी व्यवस्था मौजूद है, जहां आम नागरिक सीधे शिकायत दर्ज करा सकता है। सरकार ने सतर्कता विभाग के जरिए यह साफ व्यवस्था बनाई है कि भ्रष्टाचार की सूचना गोपनीय रहे और शिकायतकर्ता को डरने की जरूरत न पड़े।

राज्य का Vigilance Investigation Bureau रिश्वत से जुड़ी शिकायतों के लिए लगातार सक्रिय है। निगरानी विभाग की हेल्पलाइन पर 0612-2215344 या मोबाइल नंबर 776595326 पर कॉल कर या 9431800121 पर व्हाट्सऐप के जरिये सीधे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी शिकायत से जुड़ी पूरी प्रक्रिया, अधिकार और सावधानियों की जानकारी उपलब्ध कराई गई है, ताकि आम लोग बिना किसी झिझक के आगे आ सकें।

भ्रष्टाचार के मामलों में एक और प्रभावी विकल्प Anti Corruption Bureau का 1064 टोल-फ्री नंबर है। यह नंबर खासतौर पर रिश्वत और भ्रष्ट आचरण की शिकायतों के लिए बनाया गया है। एक साधारण कॉल के जरिए ही आपकी शिकायत दर्ज हो जाती है और प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

जो लोग लिखित शिकायत देना चाहते हैं, उनके लिए भी रास्ता खुला है। पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कार्यालय में जाकर आप अपनी शिकायत लिखित रूप में दर्ज करा सकते हैं।

वहां संबंधित अधिकारी आपकी बात सुनते हैं और शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज किया जाता है, ताकि आगे की कार्रवाई में कोई तकनीकी अड़चन न आए।

शिकायत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। रिश्वत मांगने वाले अधिकारी या कर्मचारी का नाम, पद और विभाग जितना स्पष्ट होगा, जांच उतनी ही प्रभावी होगी।

यदि संभव हो तो रिश्वत की मांग से जुड़ा कोई प्रमाण—जैसे ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग—सुरक्षित रखना जांच में बड़ी मदद करता है।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम पहले पूरे मामले की गोपनीय जांच करती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो विभाग द्वारा जाल बिछाया जाता है और आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई की जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया में शिकायतकर्ता की पहचान को सुरक्षित रखा जाता है, ताकि वह बिना किसी दबाव के भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा हो सके..

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