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झारखण्‍डराज्य

गंगा दशहरा पर “जोहार स्वर्ण रेखा, नमामि स्वर्णरेखा” के तहत स्वर्णरेखा नदी के लिए दौड़ और गंगा आरती का आयोजन

रिपोर्ट चारोधाम मिश्रा

रांची, (झारखंड) गंगा दशहरा के पावन अवसर पर, स्वर्णरेखा नदी के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जोहार स्वर्ण रेखा ,’नमामि स्वर्णरेखा’ के तहत विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में गंगायात्री पीयूष पाठक सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों के साथ स्वर्णरेखा नदी के लिए दौड़ लगाएंगे और बड़ा तालाब के छठ घाट पर बनारस के सात आचार्यों के साथ गंगा आरती करेंगे।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व

गंगा दशहरा का पर्व भारतीय संस्कृति में नदियों की महत्ता को दर्शाता है। मोक्षदायिनी गंगा और इसके प्रतिरूप नदियाँ आज स्वयं के उद्धार के लिए भागीरथी की प्रतीक्षा कर रही हैं।

इस पावन अवसर पर ‘नमामि स्वर्णरेखा’ पहल के तहत आयोजित दौड़ का उद्देश्य नदियों और तालाबों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प लेना है।

कार्यक्रम विवरण

दिनांक: 16 जून 2024, रविवार

समय: सुबह 8: 00 बजे से सुबह 10 बजे तक

स्थान: जयपाल सिंह स्टेडियम से स्वर्णरेखा एवं हरमू नदी के संगम, चुटिया तक

गंगा आरती: संध्या 6:30 बजे से 8:30 बजे तक, बड़ा तालाब के छठ घाट पर, बनारस के सहयोगी सात आचार्यों के साथ

पीयूष पाठक का नेतृत्व

इस पहल का नेतृत्व कर रहे पीयूष पाठक एक जाने-माने गंगायात्री हैं। उनके पिता ‘रोटी बैंक , राँची ‘ के तहत से झारखण्ड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स परिसर में विगत साढ़े चार बर्षो से प्रत्येक दिन जरूरतमंदों को भोजन कराते है ।

पीयूष पाठक ने कहा, “नदियों और तालाबों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना हमारा नैतिक दायित्व है। इस पहल के माध्यम से हम नदियों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।”

गंगा आरती: एक पवित्र अनुष्ठान

शाम को बड़ा तालाब के छठ घाट पर आयोजित गंगा आरती में बनारस के सात आचार्य शामिल होंगे।

यह पवित्र अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जल स्रोतों के प्रति हमारे कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। गंगा आरती के माध्यम से हम नदियों की महत्ता और उनकी स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करेंगे।

प्रशासनिक और राजनीतिक उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर कई प्रशासनिक और राजनीतिक व्यक्तित्वों के उपस्थित होने की संभावना है। इनकी उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी और जन जागरूकता को बढ़ावा देगी।

पर्यावरण प्रेमियों का आह्वान

सभी पर्यावरण प्रेमियों, समाजसेवियों और नागरिकों से अपील है कि वे इस दौड़ और गंगा आरती में शामिल होकर नदियों और जलाशयों की स्वच्छता और संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को व्यक्त करें।

यह सामूहिक प्रयास नदियों की स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संकल्प: नदियों और तालाबों को दूषित न करें

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नदियों और तालाबों को दूषित न करने का संकल्प लेना है। “हम सब मिलकर भागीरथी प्रयास करें और अपने जल स्रोतों की रक्षा करें,” पीयूष पाठक ने कहा।

समाज की भूमिका

समाज की भूमिका इस प्रकार के अभियानों में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नदियों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से लोग नदियों और तालाबों की महत्ता को समझेंगे और उन्हें स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक होंगे।

गंगा दशहरा पर ‘नमामि स्वर्णरेखा’ पहल के तहत आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।

आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर अपने जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण के प्रति संकल्प लें और एक स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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