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चकिया के सोनहुल गांव में जंगली सुअरों और नीलगायों का आतंक: फसलें चौपट, किसान लाचार, प्रशासन मूकदर्शक

चंदौली जिले के चकिया से सटे सोनहुल गांव में जंगली सुअरों और नीलगायों के झुंडों ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया है। खेतों में रात-दिन उत्पात मचा रहे इन वन्य प्राणियों पर कार्रवाई की कोई व्यवस्था नहीं है। किसान मुआवजे और सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन और वन विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

हाइलाइट्स

  • 50 से ज्यादा जंगली सुअर और 20+ नीलगायों के झुंड चकिया के सटे सोनहुल गांव में फसलों का कर रहे हैं सफाया।
  • फसल बीमा में नहीं है वन्य प्राणीजनित नुकसान, किसान मुआवजा और सुरक्षा के लिए बेहाल।
  • प्रशासन, वन विभाग और नेताओं की निष्क्रियता से किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

 चंदौली चकिया गांवों में जंगली सुअरों का आतंक खौफनाक

खेतों में लहलहाती फसलें अन्नदाता की मेहनत और आशा की प्रतीक होती हैं, लेकिन इन दिनों किसानों की ये मेहनत जंगली सुअर और नीलगाय के आतंक की भेंट चढ़ रही है। खासकर चकिय से सटे सोनहुल गांव में इन जानवरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि किसान अब हताश और लाचार नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही खेतों में इन जानवरों का जमावड़ा लग जाता है। जंगली सुअर फसलों को तहस-नहस करने के साथ खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे कर देता है, जिससे ना सिर्फ फसलें तबाह होती हैं बल्कि अगली बुवाई भी मुश्किल हो जाती है। वहीं नीलगायों के झुंड खेत में घुसकर खड़ी फसल को चट कर जाते हैं।इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि वन्य प्राणियों से होने वाले फसलों का नुकसान  सरकार की फसल बीमा में शामिल नहीं है।

50 से अधिक जंगली सुअर, 20 से अधिक नीलगाय  

इन गांव के किसानों का दावा है कि सोनहुल के बीच तक 50 से 55 जंगली सुअर चहलकदमी कर रहे हैं जबकि 20 से 25 नीलगायें भी खेतों में उत्पात मचा रही हैं। कई किसानों की तो एकड़ों में खड़ी फसल ये वन्य प्राणी बरबाद कर रहे हैं ।  इस संबंध में किसान लंबे अरसे से शिकायत कर प्रशासन को अपना दर्द बताते रहे हैं  लेकिन प्रशासन के पास इनसे निपटने की कोई कारगर योजना नहीं है।

किसान लाचार, किससे करें फरियाद?

स्थिति यह है कि किसान प्रशासन और वन विभाग के बीच पिस रहे हैं। उनका सवाल है कि जब कोई उनकी फसलें उजाड़ रहा है, तो वे अपनी आजीविका कैसे बचाएं? न तो मुआवजा समय पर मिल पाता है और न ही नुकसान की भरपाई होती है। स्थानीय किसान सुनील मौर्य, शहादुर मौर्य, अनिल यादव, छेदी मौर्य, जितेंद्र यादव बृजेश यादव शंकर यादव उमा यादव संजय मौर्य राजू मौर्य रामपति मौर्य धनंजय मौर्य इन किसानों कहना है, कि हमारे पास ना तो हथियार हैं और ना ही कानूनी अधिकार कि हम इन जानवरों से अपनी फसलों की रक्षा कर सकें। प्रशासन से शिकायत करते हैं तो वह वन विभाग की ओर भेज देता है, और वन विभाग के पास कोई समाधान नहीं।

समाधान की दरकार

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सरकार को जल्द से जल्द प्रभावी नीति बनानी चाहिए। फेंसिंग, ट्रेंच खुदाई, अल्ट्रासोनिक रिपेलर और अन्य तकनीकी उपायों को अपनाकर खेतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।जब तक सरकारी विभागों के बीच समन्वय नहीं होता, तब तक अन्नदाता की समस्या जस की तस बनी रहेगी। सवाल यह है कि अगर किसान ही परेशान रहेगा, तो अन्न उत्पादन कैसे होगा? अब जरूरत है कि प्रशासन, वन विभाग और सरकार मिलकर किसानों की इस गंभीर समस्या का स्थायी हल खोजें, वरना अन्नदाता का खेत ही नहीं, उसका भविष्य भी उजड़ जाएगा।

उप्र मे वन्य प्राणियों के नुकसान को फसल बीमा में शाुमिल करने का प्रावधान है लेकिन चकिया सोनहुल समेत समूचे प्रदेश में एसा नहीं है। प्रशासन फसलें चट कर रहे वन्य प्राणियों की धर पकड़ करे और सरकार इनसे होने वाले नुकसान को फसल बीमा में शामिल करे। 

मूलनिवासी गांव तिलौरीपोस्ट चकिया जिला चदौली अनिल यादव

मैंने 3 एकड़ में मक्का बोई लेकिन बाजार से मुझे 40 किलो मक्का खाने के लिए खरीदनी पड़ी। कारण , जंगली सुअर व नीलगाय ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। लगातार प्रशासन को हम किसानों ने समस्या से अवगत कराया लेकिन कोई राहत नहीं मिली। ऐसे तो जिले का किसान बर्बाद हो जाएगा। 

छोटू मौर्य

खेत में खड़ी फसलों को जंगली सुअर व नीलगाय खराब कर रहे हैं, जिससे हमें हर सीजन में नुकसान उठाना पड़ रहा है। जंगली सुअर अब धान का दुश्मन बन रहा है जो खेतों में गड्ढे बनाकर पूरी फसल बरबाद कर रहा है। अभी हम मार दें तो वन्य प्राणी अधिनियम लगाकर कार्रवाई करने अधिकारी दौड़े आएंगे लेकिन इनसे हो रहे नुकसान को वे नजरंदाज कर रहे हैं। 

रामपति मौर्य

हम अपनी फसलों को जंगली सुअरों व नीलगायों द्वारा बरबाद करते देखने के लिए मजबूर हैं। प्रशासनिक अधिकारी हाथ हाथ पर धरे बैठे हैं। शिकायत करो तो नियम व अधिनियम बताने लगते हैं। नेताओं को फुर्सत नहीं है ओर अधिकारी विमुख हैं। आखिर हम किसके पास फरियाद करें? 

 

चंदौली ब्यूरो चीफ – नितेश सिंह यादव की रिपोर्ट
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