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जब प्रधान हो उछल-कूद करने वाला बंदर, तो विकास कैसे होगा?… गढ़वा सेमरौर में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

चंदौली- चकिया तहसील गढ़वा सेमरौर के गांव में विकास कार्य योजना असफल रही है. सड़कों की हालत खराब है, बड़ी संख्या की आबादी के बावजूद बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. ग्रामीण प्रधान से नाराज हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार की विकास कार्य योजना का मकसद था ग्रामीण को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ना, लेकिन चंदौली ज़िला के चकिया तहसील के गांव गढ़वा सेमरौर आज भी बदहाल हालात में जी रहे हैं. मीडिया की टीम जब गांव के ग्राउंड पर पहुंची, तो गांव की हालत देखकर हैरान रह गई. लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, और हर कोई अपनी व्यथा सुनाने को तैयार था.

गांव की सड़कों का हाल बेहाल

चकिया तहसील की ग्राम पंचायत गढ़वा सेमरौर गांव की सड़कें इतनी टूटी हुई हैं कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क. बारिश के मौसम में तो यहां के हालात और भी खराब हो जाते हैं सड़कें कीचड़ और पानी से भरकर तालाब बन जाती हैं. जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है.
‘प्रधान केवल उछल-कूद करता है’….

गांव के लोगों ने वर्तमान ग्राम प्रधान के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की. किसी ने उन्हें “उछल-कूद करने वाला बंदर” कहा, तो किसी ने “आपराधिक प्रवृत्ति वाला इंसान”. ग्रामीणों का कहना है कि यहां की कोई सुध नहीं ली जाती. बीते साढ़े चार साल में कोई भी ठोस विकास कार्य नहीं हुआ है न सड़क बनी, न नालियां. हालात जस के तस बने हुए हैं.

बड़ी संख्या की आबादी, कोई सुविधा नहीं

गढ़वा सेमरौर गांव में बड़ी संख्या की आबादी है, लेकिन लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. न तो सड़कें बनीं, न ही नालियों का निर्माण हुआ. बारिश में यहां घर से बाहर निकलना एक चुनौती बन जाता है. वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना तक दूभर हो जाता है. ग्रामीणों ने प्रधान के खिलाफ नारेबाजी भी की और अपनी नाराजगी खुलकर ज़ाहिर की.

 

चंदौली ब्यूरो चीफ – नितेश सिंह यादव की रिपोर्ट
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