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जब न्याय की वर्दी लहूलुहान होती है, तब संविधान की आत्मा रोती है: प्रो. गौरी शंकर

जब न्याय की वर्दी लहूलुहान होती है, तब संविधान की आत्मा रोती है: प्रो. गौरी शंकर

दलित आईपीएस वाई पूरन कुमार को खुदकुशी के लिए मजबूर करना संवैधानिक मूल्यों की हत्या: सचिव नन्दकिशोर पासवान

जमुई जिला ब्यूरो बिरेंद्र कुमार की रिपोर्ट 

जमुई:- सीजेआई जूता कांड अभी थमा भी नहीं है कि हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार खुदकुशी की घटना पूरे देश में सनसनी फैला दी है।

गौरव तलब है कि हरियाणा में एक दलित आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार ने 15 आईपीएस के द्वारा जाति सूचक शब्द कहकर अपमान करने और तरह-तरह की प्रताड़ना देने के कारण विगत 7 अक्टूबर 2025 को खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट पर स्व. पूरण कुमार ने 15 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

          आईपीएस वाई पूरण कुमार सुसाइड कांड पर प्रतिक्रिया देते हुए जमुई जिला अनुसूचित जाति/ जनजाति कर्मचारी संघ के संरक्षक एवं केकेएम कॉलेज के सहायक प्राचार्य डॉ.गौरी शंकर पासवान ने कहा कि आईपीएस हत्याकांड समानता, न्याय और संविधान पर गहरा प्रश्न चिन्ह है।

सुसाइड नोट के अनुसार 15 आईएएस /आईपीएस अधिकारियों जिन्होंने वाई पूरण कुमार (एसस) को जाति सूचक शब्द का प्रयोग करते हुए अपमानित करना और आत्महत्या करने के लिए बाध्य करना संगीन अपराध है।

उन्होंने कहा कि जब न्याय की वर्दी अपने ही खून से लहूलुहान होती है, तब संविधान की आत्मा भी रो पड़ती है। वह वर्दी जो कभी सुरक्षा और समानता की प्रतीक थी। आज भेदभाव और उत्पीड़न की गारंटी दे रही है।

दलित आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या केवल एक व्यक्ति की त्रासदी ही नहीं, बल्कि उस सामाजिक अन्याय की चिख है, जिसे समाज देखने की आदत डाल ली है। जब सिस्टम संवेदना खो देती है, तो संविधान की धाराएं भी मौन हो जाती हैं। जब कानून की धाराओं का उल्लंघन होता है,तब संविधान भी आंसू बहाता है।

हरियाणा की आईपीएस वाई पूरण कुमार (डीआईजी) की खुदकुशी पूरे देश को झकझोर दिया है। कानून के रक्षक ही भेदभाव करें, किसी को खुदकुशी के लिए विवश करें, तो आम नागरिक की रक्षा कौन करेगा ?

        अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के सचिव श्री नंदकिशोर पासवान ने कहा कि आईपीएस वाई पूरन कुमार खुदकुशी कांड एक व्यक्ति का दर्द नहीं, अपितु चेतावनी है कि समाज और सरकार को अपनी जिम्मेदारियां गंभीरता से निभानी चाहिए।

किसी आईपीएस अधिकारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना,जाति सूचक शब्द का प्रयोग कर अपमानित करना तथा आत्महत्या करने के लिए मजबूर करना संवैधानिक मूल्यों की हत्या है।

यह कृत्य मानवाधिकार का उल्लंघन ही नहीं, गैरजमानती संज्ञेय अपराध भी है। आईपीएस सुसाइड कांड किसी भी आई जांच होनी चाहिए और उन 15 आरोपियों पर विधि सम्मत करवाई होनी चाहिए।

         इस दुःखद घटना से अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के सदस्यों ने आईपीएस वाई पूरण कुमार की खुदकुशी घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुए हरियाणा सरकार से घटना की निष्पक्षव और त्वरित सीबीआई जांच की मांग की है।

आरोपियों को कठोर सजा दिलाकर हरियाणा की सरकार साबित करें की कानून सबके लिए बराबर है। उपाध्यक्ष श्री फागु दास, महेश दास, कृष्ण नंदन आर्य, प्रखण्ड सचिव नागेश्वर तुरी, रामदेव दास, कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार पासवान, सखी चंद पासवान इत्यादि।

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