[wpdts-weekday-name] [wpdts-day]/ [wpdts-month]/ [wpdts-year] 

रेलवे संघर्ष समिति बिहटा अरवल एवं औरंगाबाद का आज दिल्ली के जंतर मंतर पर होगा धरना प्रदर्शनडबल म*र्डर के मुख्य आरोपी पप्पू सिंह ने किया सरेंडरडीएम सीतामढ़ी ने पंचायती राज विभाग की योजनाओं की समीक्षा, सोलर स्ट्रीट लाइट योजना पर जताई नाराजगीजनसमस्याओं के तत्वरित समाधान को लेकर जनता दरबार कार्यक्रम नए स्वरूप में आयोजितनरकटियागंज से पाटलिपुत्र के लिए प्रतिदिन 4 ट्रेनें जाती है और आती 3 है…..मैट्रिक, इंटर परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए रेलवे का बड़ा फैसला, दो जोड़ी मेमू ट्रेन का विभिन्न हॉल्ट पर एक मिनट का दिया गया ठहराव।बटिया पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चेकिंग के दौरान पिक अप वाहन जप्त, 486 लीटर विदेशी शराब बरामद, चालक गिरफ्तारबरन कन्या उत्थान न्यास समिति द्वारा गया में कार्यक्रम आयोजित कर छह बेटियों को दी गई आर्थिक सहयोग, बतौर मुख्य अतिथि ओंकारनाथ बरनवाल हुए शामिलविभिन्न मांगों को लेकर तीन दिनो से लगातार चकाई में अनसन पर बैठे अनसन कारियों को पुर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद ने तुड़वाया अनसनएसपी स्वर्ण प्रभात ने दो दारोगा को किया सस्पेंड- कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप
Viral Videoउत्‍तर प्रदेशटॉप न्यूज़देशभाषाराज्य

मरीजों की दवाओं के लिए पैसे देने में फेल है डबल इंजन सरकार, बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में दवाओं का संकट गहराया

चंदौली के बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज में तीन माह से राज्य बजट न मिलने के कारण दवाओं का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दैनिक 2000 मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है, जिससे वे बाहर से दवाएं लेने को मजबूर हैं। कॉलेज को प्रथम त्रैमासिक का ही बजट मिला था, जो समाप्त हो चुका है। पहले उपलब्ध 287 प्रकार की दवाओं की संख्या अब 100 से कम हो गई है।

चंदौली मेडिकल कॉलेज में बजट न मिलने से दवाओं का टोटा

मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतरी

3 माह से बजट न मिलने से मरीजों को नहीं मिल रही पूरी दवाएं

आला अधिकारियों के पास नहीं है कोई जवाब

चंदौली जिले में स्थित बाबा कीनाराम स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि कॉलेज को पिछले तीन महीने से राज्य बजट का आवंटन नहीं किया गया है। जहां प्रदेश सरकार चिकित्सा क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं इस नए मेडिकल कॉलेज में बजट संकट के चलते मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। दूर-दूर से इलाज के लिए आ रहे मरीजों को डॉक्टर दवा तो लिख देते हैं, लेकिन दवा वितरण केंद्र पर लंबी कतार में लगने के बाद भी उन्हें लिखी गई पांच में से महज दो या तीन प्रकार की दवाएं ही मिल पाती हैं, जिससे वे बाहर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।

दवाओं की उपलब्धता में आई भारी गिरावट

पहले यह अस्पताल जिला अस्पताल था, जहां दवाएं सीधे कार्पोरेशन से आती थीं और उनका भुगतान शासन से होता था। लेकिन जब से यह मेडिकल एजुकेशन में बदला है, तब से दवाओं का भुगतान कॉलेज को कार्पोरेशन को करना पड़ता है। भुगतान न होने के कारण कार्पोरेशन ने दवा आपूर्ति लगभग बंद कर दी है। फार्मासिस्ट जेके पाल ने बताया कि आमतौर पर मेडिकल कॉलेज में 287 प्रकार की दवाएं हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए, लेकिन बजट संकट के कारण यह संख्या अब 100 के अंदर सिमट गई है। इस कारण आए दिन दवा लेने आए मरीजों से झिकझिक होती रहती है। दावा किया जा रहा है कि कॉलेज में दैनिक 2000 के आसपास मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं।

यूजर चार्ज की धनराशि भी समाप्त

कॉलेज के संचालन के लिए शासन से त्रैमासिक बजट आवंटित किया जाता है, जिसमें स्टाफ का वेतन और दवा आदि का खर्च शामिल होता है। कॉलेज को प्रथम त्रैमासिक में जो बजट मिला था, वह पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इसके बाद सितंबर से ही बजट का इंतजार किया जा रहा है। एक बार यूजर चार्ज के मद से 25 लाख की दवा तो खरीदी गई थी, लेकिन अब उस मद का प्रयोग भी नहीं किया जा सकता है, जिससे दवाओं का टोटा गहरा गया है। हालांकि, प्रबंधन जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने का दावा कर रहा है।

प्रधानाचार्य ने जताई बजट मिलने की उम्मीद

इस गंभीर स्थिति पर बाबा कीनाराम स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य अमित सिंह ने कहा कि प्रथम त्रैमासिक में बजट मिला था, जिसके बाद से लगातार शासन को पत्र भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो-तीन दिन में बजट आवंटित होने की संभावना है, जिससे कॉलेज में दवाओं की कमी को दूर किया जा सकेगा।

 

Check Also
Close