
कुर्मी चेतना महारैली के सूत्रधार सतीश कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे बरबीघा विधानसभा चुनाव को रोचक बनाया।
बरबीघा के मतदाताओं में रुझान देख जीत के प्रति आस्वस्त दिखें।
शेखपुरा ब्यूरो रंजन कुमार की रिपोर्ट
शेखपुरा: विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शेखपुरा बरबीघा 170 विधानसभा सीट कई चर्चित प्रत्याशियों के मैदान में आ जाने से काफी हॉट सीट बनता जा रहा है। रोज नए समीकरण बनते और बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं।
एक तरफ जहां नगर परिषद एवं ग्राम पंचायत के आनेको चुनावों में किंग और किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले मुखिया रहे त्रिशूल धारी सिंह जहां महागठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बरबीघा विधानसभा सीट से ताल ठोक रहे हैं वही एनडीए गठबंधन के रूप में जदयू प्रत्याशी के रूप में डॉ कुमार पुष्पांजय अचानक मैदान में आकर लोगों को चौका देने का काम कर रहे हैं।

टिकट नहीं मिलने पर दो बार लगातार विधायक रहे सुदर्शन कुमार भी पूरी दमखम के साथ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बरबीघा के चुनावी मैदान में कूद चुके हैं वही जनसुराज कैप्टन मुकेश सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। यादव जाति से संजय प्रभात भी भाग्य आजमा रहे हैं।
लेकिन सभी समीकरणों से अलग अलग राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी और दो बार के विधायक रहे एवं कुर्मी चेतना महारैली के सूत्रधार सतीश कुमार ने बरबीघा विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कर सभी चुनावी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।
लव कुश के अलावा पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के साथ दलित एवं महा दलित समाज के बीच अपना खास पहचान रखने के कारण यह अभी से ही अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिख रहे हैं।
भारतीय लोक चेतना पार्टी के संरक्षक निशिकांत सिन्हा ने कहा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में “अबकी बार, वंचितों की सरकार” के नारे के साथ बिहार की राजनीति को नई दिशा देने का संकल्प किया है।

उन्होंने कहा कि जो बिहार के अति-पिछड़ा, पिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक वर्गों को एकजुट कर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक न्याय दिलाने की दिशा में काम करेगा। निशिकांत सिन्हा ने कहा कि आज बिहार की राजनीति का नया सवेरा आने वाला है।
यह मंच उन 90 प्रतिशत बिहारियों की आवाज़ है, जिन्हें सदियों से सत्ता के मालिकों ने हाशिये पर रखा। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा जिसका हक और अधिकार है उसी के हाथ में बिहार की सट्टा होगी।




















