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पूर्व जिला पार्षद आनंद चंद्रवंशी ने केंद्र सरकार से यूजीसी में सुधार करने की मांग

पूर्व जिला पार्षद आनंद चंद्रवंशी ने केंद्र सरकार से यूजीसी में सुधार करने की मांग

अरवल जिला ब्यूरो बिरेंद्र चंद्रवंशी की रिपोर्ट 

पूर्व जिला पार्षद एवं भाजपा पंचायतीराज प्रकोष्ठ, बिहार प्रदेश के सहसंयोजक आनंद कुमार चन्द्रवंशी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी “उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता प्रोत्साहन विनियम, 2026” (यूजीसी समानता विनियम) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत तथा अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना और सभी विद्यार्थियों को सुरक्षित तथा समान अवसर वाला शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रावधान संसद द्वारा पारित कानून नहीं, बल्कि यूजीसी अधिनियम के अंतर्गत जारी नियामक विनियम हैं, जिनका पालन विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए अनिवार्य होता है। इसलिए इन्हें सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल या प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन या विरोध से जोड़ना उचित नहीं है।

चन्द्रवंशी ने कहा कि यद्यपि इन नियमों का उद्देश्य सकारात्मक है, फिर भी इसमें कुछ सुधारों की आवश्यकता है। उनका कहना है कि ओबीसी वर्ग के भीतर कुछ सामाजिक समूहों के व्यवहार के कारण कमजोर ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों को असमानता या हीन भावना का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार और यूजीसी से निम्न मांगें रखीं—

नियमों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और जवाबदेही तंत्र बनाया जाए, ताकि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की गुंजाइश कम हो।

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के भीतर सामाजिक-आर्थिक स्थिति का समुचित अध्ययन किया जाए, जिससे कमजोर और हाशिये पर मौजूद समूहों को वास्तविक सुरक्षा और अवसर मिल सकें।

शिकायत निवारण तंत्र पारदर्शी, समयबद्ध और संतुलित हो, जिससे पीड़ितों को न्याय मिले और किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे सामाजिक रूप से विविध देश में शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जहाँ हर जाति, समुदाय और वर्ग के विद्यार्थियों को सम्मान, सुरक्षा और न्याय मिले। नियमों का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और समानता को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी प्रकार का नया विवाद उत्पन्न करना।

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