[wpdts-weekday-name] [wpdts-day]/ [wpdts-month]/ [wpdts-year] 

एक रात में उजड़ गया बिहार के किशनगंज का घर, इंदौर आग हादसे में 6 परिजन जिंदा जलेहाथ लगाते ही उड़ रहा प्लास्टर, बेगूसराय स्थित सिमरिया ब्रिज की गुणवत्ता पर बड़ा सवालअब बिहार में कुर्सी-टेबल की कमी नहीं, नेचर पॉलीप्लास्ट लिमिटेड ने शुरू किया उत्पादनथाना परिसर में शांति समिति की हुई ईद वा रामनवमी को लेकर बैठकबिहार सरकार की अपील बेअसर, 300 सीओ-राजस्व अधिकारी अभी भी हड़ताल पर…न्यायालय द्वारा निर्गत नोटिस के बाद सोनो पुलिस ने फरार अभियुक्त के घर चिपकाया इस्तेहारअन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की केंद्रीय सूची का उप-वर्गीकरण करना को लेकर निवेदनचिरैया थाना क्षेत्र से सुखा नशा कारोबारी हुआ गिरफ्तार कर अग्रिम कार्रवाई में जुटे अधिकारी धनबल-मशीनरी से जीती NDA, मगर हमारी लड़ाई खत्म नहीं, तेजस्वी यादव की हुंकारगैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर जिलाधिकारी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील
टॉप न्यूज़नालंदाबिहारराज्य

अरावली पहड़वा बचा ल बबुआ.. हिरण्य पर्वत से उठी आवाज़ 

अरावली पहड़वा बचा ल बबुआ.. हिरण्य पर्वत से उठी आवाज़

नालंदा संवाददाता

विगत कुछ दिनों से विश्व की प्राचीनतम पर्वत अरावली को बचाने की कोशिश देश के पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न मंचों से उठाई जा रही है। अब यह आवाज राजस्थान से चलकर बिहार के नालंदा तक पहुंच चुकी है।

नालंदा जिले के युवा भी आगे आए

बीते सोमवार को जिले के युवा पर्यावरण संरक्षक की बैठक बिहारशरीफ स्थित हिरण्य पर्वत पर आयोजित की गई। इस मौके पर नालंदा कॉलेज की छात्रा प्रीति सुमन ने अरावली को समर्पित स्वरचित गीत ‘अरावली पहड़वा बचा ल बबुआ..’ प्रस्तुत की।

चलेगा हस्ताक्षर अभियान

विचार विमर्श के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि एक आवेदन के साथ जिले में अरावली को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जाएगा। साथ जिले के आम से खास के बीच भी अरावली बचाने को लेकर चर्चा और समर्थन मांगा जाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण कई अरावली

प्रत्येक भौगोलिक और जलवायु क्षेत्र में एक खास तरह की पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता का विकास होता है जो अन्यत्र बहुत कम हीं देखने को मिलता है ऐसे में अरावली भी कई मायने में आवश्यक है। इससे देश की संस्कृति भी जुड़ी हुई है,इसलिए इसका धरती होना उतना हीं आवश्यक है जितना अन्य जीवों का।

क्या कहते हैं पर्यावरण विद

गौरैया विहग फाउंडेशन के संस्थापक राजीव रंजन पाण्डेय ने कहा कि आज के दौर में विकास आवश्यक है,लेकिन पर्यावरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अरावली स्थानीय स्तर पर कई मायने में महत्वपूर्ण है,इसके क्षति से पर्यावरण पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

इस चर्चा में बिट्टू कुमार,सर्वेश कुमार, सौरभ कुमार, अभिषेक कुमार, राज कुमार के अलावे अन्य लोग भी उपस्थित थे।

Check Also
Close