
ताड़का-सुबाहु वध के मंचन से रोमांचित हुए दर्शक, 108 अंक की महत्ता पर भी हुई चर्चा
– रामलीला के दूसरे दिन वरीय नाट्य कलाकारों को अंगवस्त्र देकर किया गया सम्मानित
ब्यूरो रिपोर्ट बीरेंद्र चंद्रवंशी
हसपुरा / औरंगाबाद। हसपुरा मेन बाजार स्थित श्री श्री आदिशक्ति माँ दुर्गा मंदिर प्रांगण में नवरात्र के अवसर पर चल रहे दस दिवसीय रामलीला के दूसरे दिन सोमवार की रात ताड़का और सुबाहु वध का जीवंत मंचन किया गया।भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पराक्रम तथा राक्षसों के संहार के दृश्यों नें दर्शकों को रोमांचित कर दिया।कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय पर परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
माता ब्रह्मचारिणी की पूजा के बाद भगवान श्रीराम की आरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।इस दौरान रामलीला मंडली के महंत पुष्पराज चौरसिया नें स्थानीय वरीय नाट्य कलाकार अशोक जैन,दरोगा प्रसाद,विनोद शौंडिक और प्रदीप गुप्ता सहित अन्य कलाकारों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।पूजा समिति के मुख्य संरक्षक संजय शौंडिक नें कलाकारों का स्वागत किया।
रामायण के बालकांड पर आधारित मंचन में राजा दशरथ और महर्षि विश्वामित्र के संवाद,यज्ञ में राक्षसों द्वारा विघ्न डालने तथा गुरु के आदेश पर श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा ताड़का और सुबाहु का वध करने के प्रसंग को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया।देर शाम से हीं महिलाओं,बच्चों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी।
इस अवसर पर वरीय नाट्य कलाकार अशोक जैन नें 108वें पूजन उत्सव के संदर्भ में सनातन धर्म में 108 अंक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में इस संख्या को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है।
रुद्राक्ष व तुलसी की माला में 108 मनके होते हैं तथा मंत्रों का जाप भी 108 बार करने की परंपरा है। वैदिक ज्योतिष में 12 राशियों और 9 ग्रहों का गुणनफल भी 108 होता है।उन्होंने कहा कि यह अंक आध्यात्मिक साधना,आस्था और ब्रह्मांडीय पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
कार्यक्रम का संचालन अनिल आर्य नें किया।उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करना आज की पीढ़ी के लिए बेहद जरूरी है।रामलीला मंडली के कलाकारों नें विभिन्न भूमिकाओं का प्रभावशाली निर्वहन कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।




















