
भाई-बहनों के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
जमुई से चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट
जमुई। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह, विश्वास और रक्षा के पावन पर्व रक्षाबंधन को जिलेभर में हर्षोल्लास एवं पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। सावन माह की पूर्णिमा के अवसर पर जमुई जिले के विभिन्न प्रखंडों में बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों की हर परिस्थिति में रक्षा करने का संकल्प लिया।
रक्षाबंधन के अवसर पर घरों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बहनों ने पूजा-अर्चना के बाद भाइयों को राखी बांधी और मिठाई खिलाकर इस पवित्र रिश्ते की मिठास को और मजबूत किया। भाइयों ने भी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति अपना स्नेह और सम्मान व्यक्त किया।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है रक्षाबंधन का इतिहास
रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि राजा बलि द्वारा महायज्ञ किए जाने के दौरान भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी थी। भगवान वामन ने दो पग में ही तीनों लोक नाप लिए और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर प्रस्तुत कर दिया।
कथा के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि के यहां पहरेदारी करने लगे। इसके बाद माता लक्ष्मी ने अपने पति भगवान विष्णु को बैकुंठ वापस लाने के लिए सावन पूर्णिमा के दिन राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया। जब राजा बलि ने माता लक्ष्मी से उपहार मांगने को कहा तो उन्होंने भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने का वचन मांगा, जिसे राजा बलि ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।
द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा भी है प्रसिद्ध
महाभारत काल से जुड़ी रक्षाबंधन की कथा भी अत्यंत भावुक और प्रसिद्ध है। युद्ध अभ्यास के दौरान सुदर्शन चक्र से भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में हल्की चोट लग गई और रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी रेशमी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया, जिससे रक्त बहना बंद हो गया।
द्रौपदी के इस स्नेह और करुणा से प्रभावित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी बहन के समान माना और संकट के समय उनकी रक्षा करने का वचन दिया। मान्यता है कि चीरहरण के समय भगवान श्रीकृष्ण ने इसी वचन का पालन करते हुए द्रौपदी की लाज बचाई थी।
इसी प्रेम, विश्वास और रक्षा के भाव को आगे बढ़ाते हुए आज भी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी मंगलकामना करती हैं, जबकि भाई जीवनभर अपनी बहनों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन का यह पावन पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।


















