
प्राचीन इमली पेड़ के नीचे विराजमान बाबा ब्रह्मदेती एवं कुलाजोत बाबा की वार्षिक पूजा संपन्न
श्रद्धालुओं ने धूप-दीप, नैवेद्य व खीर का भोग लगाकर की पूजा-अर्चना, परिवार और समाज की सुख-शांति व समृद्धि की कामना
जमुई से चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट
जमुई: दहियारी। आदर्श ग्राम पंचायत दहियारी में रविवार को प्राचीन इमली पेड़ के नीचे विराजमान बाबा ब्रह्मदेती एवं कुलाजोत बाबा की वार्षिक पूजा विधिवत संपन्न हुई। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं में बाबा के प्रति गहरी आस्था देखने को मिली। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की तथा खीर का भोग लगाया।
बताया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा बाबा से मांगी गई मन्नतें पूरी होने के बाद परंपरा के अनुसार बकरे एवं मुर्गे की बलि भी चढ़ाई गई। बाबा ब्रह्मदेती के स्थान पर दर्जनों बकरे एवं कुलाजोत बाबा के स्थान पर चार दर्जन से अधिक मुर्गों की बलि चढ़ाए जाने की बात बताई गई। पूजा के बाद नियमानुसार बकरे के मांस को मंदिर के समीप पकाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया।
सैकड़ों वर्षों पुरानी है पूजा की परंपरा
स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा ब्रह्मदेती की पिंडी की स्थापना सैकड़ों वर्ष पूर्व बरनवाल समाज, दहियारी द्वारा की गई थी। तभी से आषाढ़ मास में बाबा ब्रह्मदेव की विधिवत पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। पूजा संपन्न कराने के लिए गांव के मंडल परिवार से एक व्यक्ति को पुजारी के रूप में चयनित किया गया था और तब से उसी परिवार द्वारा पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जा रही है।

समय के साथ बाबा ब्रह्मदेती की महिमा आसपास के गांवों तक पहुंची और श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाओं के लिए बाबा से मन्नतें मांगनी शुरू कीं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना एवं बलि चढ़ाने की परंपरा भी जारी है।
बीमारी से मुक्ति मिलने की भी है मान्यता
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा ब्रह्मदेती की महिमा अपरंपार है। सच्चे मन से बाबा से आराधना एवं मन्नत मांगने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। ग्रामीणों के बीच यह भी मान्यता है कि बाबा की पिंडी स्थापित होने के बाद से पंचायत के लोगों को कई गंभीर बीमारियों से राहत मिली है।
पूजा अनुष्ठान संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर का प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने बाबा से अपने परिवार एवं समाज की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

पुजारी बैचु मंडल के निधन के बाद पुत्र ने निभाई परंपरा
बताया गया कि करीब एक माह पूर्व पूजा कराने वाले पुजारी बैचु मंडल का आकस्मिक निधन हो गया था। इस कारण आषाढ़ माह में होने वाली वार्षिक पूजा निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। सावन माह बीतने के बाद भादो महीने के प्रथम रविवार को उनके पुत्र जितेंद्र मंडल द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
इस दौरान प्राचीन धार्मिक परंपरा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था।


















