[wpdts-weekday-name] [wpdts-day]/ [wpdts-month]/ [wpdts-year] 

एक रात में उजड़ गया बिहार के किशनगंज का घर, इंदौर आग हादसे में 6 परिजन जिंदा जलेहाथ लगाते ही उड़ रहा प्लास्टर, बेगूसराय स्थित सिमरिया ब्रिज की गुणवत्ता पर बड़ा सवालअब बिहार में कुर्सी-टेबल की कमी नहीं, नेचर पॉलीप्लास्ट लिमिटेड ने शुरू किया उत्पादनथाना परिसर में शांति समिति की हुई ईद वा रामनवमी को लेकर बैठकबिहार सरकार की अपील बेअसर, 300 सीओ-राजस्व अधिकारी अभी भी हड़ताल पर…न्यायालय द्वारा निर्गत नोटिस के बाद सोनो पुलिस ने फरार अभियुक्त के घर चिपकाया इस्तेहारअन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की केंद्रीय सूची का उप-वर्गीकरण करना को लेकर निवेदनचिरैया थाना क्षेत्र से सुखा नशा कारोबारी हुआ गिरफ्तार कर अग्रिम कार्रवाई में जुटे अधिकारी धनबल-मशीनरी से जीती NDA, मगर हमारी लड़ाई खत्म नहीं, तेजस्वी यादव की हुंकारगैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर जिलाधिकारी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील
Viral Videoउत्‍तर प्रदेशटॉप न्यूज़देशभाषाराज्य

नौगढ़ में सीड बाल गुलेल विधि से रोपे जा रहे हैं नए पौधे, बीजारोपण के लिए जारी है ये अनोखी पहल

स्थानीय ग्रामीणों ने इस अभियान की प्रशंसा की और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि ऐसी छोटी-छोटी पहलकदमियां बड़े बदलाव ला सकती हैं।

नौगढ़ से शुरू हुआ अनोखा बीजारोपण अभियान

सीड बाल गुलेल विधि: पर्यावरण संरक्षण की नवीन तकनीक

मिट्टी की गोलियों में भरकर किए गए पेड़ों के बीज

गुलेल से जंगलों में फेंके गए हजारों बीज

चंदौली जिले के नौगढ़ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में अभिनव प्रयोग की शुरुआत की गई है। महर्षि वाल्मीकि सेवा संस्थान के तत्वावधान में “सीड बाल गुलेल विधि” से जंगलों में बीजारोपण किया जा रहा है। इस नवाचारी विधि के तहत बच्चों और स्वयंसेवकों ने मिट्टी की गोलियों में बीज भरकर उन्हें जंगलों में गुलेल से फेंका, जिससे बरसात में बीज अंकुरित होकर प्राकृतिक रूप से पौधे बन सकें।

जानिए कैसे होती है सीड बाल गुलेल विधि
इस विधि में बीजों को पहले मिट्टी में लपेट कर गोलियों का रूप दिया जाता है। फिर इन गोलियों को धूप में सुखाया जाता है ताकि ये कठोर हो जाएं। इसके बाद इन ‘सीड बॉल्स’ को जंगलों में गुलेल या हाथ से फेंका जाता है। बारिश होने पर मिट्टी गल जाती है और बीज मिट्टी में मिलकर अंकुरित हो जाते हैं।

कई प्रजातियों के बीजों का उपयोग
संस्थान प्रमुख सुरेश सिंह ने बताया कि मई-जून में बच्चों ने गूलर, पीपल, बरगद, चिलबिल, कटहल, अमरूद, इमली, वेल, सहजन और पलाश जैसे पेड़ों के बीजों से हजारों सीड बाल तैयार किए।

जुलाई से जंगलों में बीजारोपण
बारिश की शुरुआत के साथ ही जुलाई में ये सीड बाल नौगढ़ के विभिन्न जंगलों में फेंके जा रहे हैं। अब तक ये बीज चिकनी, औरवाटाड़, हड़ही, वैरगाढ़, धनकुंवारी, बकुलघट्टा, गंगापुर, देवदत्तपुर, तेंदुआ, मजगाई परसहवां और चकरघट्टा के जंगलों में बिखेरे जा चुके हैं।

पर्यावरण के लिए वरदान
इस विधि की खासियत यह है कि इसमें पौधों को रोपने, पानी देने या गड्ढा खोदने की जरूरत नहीं पड़ती। यह पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो जंगलों में जैव विविधता बढ़ाने और हरियाली लाने में मददगार होती है।

बच्चों की सक्रिय भागीदारी
इस पहल में संस्थान के छात्रावास में रहने वाले बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विजेंद्र कुमार, महेश कुमार, कन्हैया लाल सहित कई बच्चों ने जंगलों में जाकर बीज फेंके और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

स्थानीय लोगों ने की सराहना
स्थानीय ग्रामीणों ने इस अभियान की प्रशंसा की और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि ऐसी छोटी-छोटी पहलकदमियां बड़े बदलाव ला सकती हैं।

 

Check Also
Close