
अब सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की पैसे के अभाव में नहीं होंगी मौत?
तत्काल 01 लाख 50 हजार की मिलेगी मदद।
सरकारी अस्पतालो के आलवे कई हॉस्पिटल को किया गया चिह्नित।
देव पुष्पा ऑर्थोपेडिक सेंटर,जिले के नामी डॉक्टर, नीरज साह को किया गया शामिल।
DPRO जमुई डॉ मेनका ने दी जानकारी।
जमुई जिला ब्यूरो बिरेंद्र कुमार की रिपोर्ट
बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब जमुई जिले के सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल राहत पहुँचाने के लिए ₹1.5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी।
इस योजना को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने जमुई जिले के कुल 15 चिकित्सा संस्थानों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ जिले के प्रतिष्ठित निजी नर्सिंग होम और स्पेशलिटी सेंटर भी शामिल हैं।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब घायलों के परिजनों को इलाज के खर्च की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उपचार का सारा खर्च सरकार द्वारा सीधे संबंधित अस्पतालों को भुगतान किया जाएगा।
इससे न केवल निजी अस्पतालों में सामान्य नागरिकों की पहुँच आसान होगी, बल्कि दुर्घटना के ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती महत्वपूर्ण समय में बिना किसी आर्थिक बाधा के त्वरित इलाज संभव हो सकेगा।
योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु जमुई के जिन अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, उनमें जिला अस्पताल जमुई सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरा और सोनो, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरा, बरहट, गिद्धौर एवं अलीगंज, तथा रेफरल अस्पताल चकाई, झाझा और लक्ष्मीपुर जैसे प्रमुख सरकारी संस्थान शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त गंभीर चोटों, विशेषकर हड्डी से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञों के रूप में डी.ई.ओ. पुष्पा कम्प्यूटरीकृत ऑर्थोपेडिक एवं पॉली क्लिनिक सेंटर, सत्यम नर्सिंग होम, जे. पी. अस्पताल, आर. के. हड्डी अस्पताल और आँखों की गंभीर चोटों हेतु आई केयर आई हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर को भी इस सूची में विशेष स्थान दिया गया है। इन सभी चिन्हित 15 संस्थानों में दुर्घटना पीड़ितों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज मुहैया कराया जाएगा।
यह पहल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और सड़क सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, ताकि समय पर उचित चिकित्सा उपचार के माध्यम से अधिक से अधिक अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सके।




















