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अंचल अधिकारियों की हड़ताल के बीच राजस्व कार्यों के निष्पादन हेतु जमुई जिलाधिकारी की विशेष पहल

अंचल अधिकारियों की हड़ताल के बीच राजस्व कार्यों के निष्पादन हेतु जमुई जिलाधिकारी की विशेष पहल

प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों एवं पंचायत सचिवों को दिया गया गहन प्रशिक्षण

जमुई जिला ब्यूरो बिरेंद्र कुमार की रिपोर्ट 

जमुई: जिले में अंचल अधिकारियों की जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण आम जनता को हो रही कठिनाइयों और राजस्व कार्यों में आ रहे गतिरोध को देखते हुए जिलाधिकारी नवीन (भा.प्र.से.) ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की है।

जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, जमीनी विवादों के त्वरित समाधान और राजस्व व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से अपर समाहर्ता रविकांत सिन्हा के नेतृत्व में जिले के सभी प्रभारी प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों (BDOs) के लिए एक विशेष राजस्व प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अंचल अधिकारियों की अनुपस्थिति में भी राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों को निर्बाध रूप से संचालित करना है ताकि आम जनमानस को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशिक्षण के दौरान भूमि उप समाहर्ता सुजीत कुमार (DCLR), जमुई द्वारा राजस्व से जुड़े सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं को अत्यंत बारीकी से समझाया गया। उन्होंने विशेष रूप से भूमि विवादों के निपटारे, सीमांकन और सरकारी भूमि के संरक्षण से संबंधित जटिलताओं पर प्रकाश डाला, ताकि फील्ड में कार्य करते समय पदाधिकारियों को किसी प्रकार की संशय की स्थिति न रहे।

जिलाधिकारी के निर्देश पर इस प्रशिक्षण में उन सभी पंचायत सचिवों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया जो वर्तमान में राजस्व कर्मचारी के प्रभार में हैं।

साथ ही, कार्य को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने हेतु प्रत्येक प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के साथ एक-एक योग्य अंचल ऑपरेटर और योग्य अमीन की भी सहभागिता सुनिश्चित की गई।

प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए अपर समाहर्ता श्री रविकांत सिन्हा ने स्पष्ट किया कि हड़ताल के कारण जनता के कार्यों में विलंब कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अमीनों और ऑपरेटरों को सख्त निर्देश दिए कि वे प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर लंबित मापी और डेटा प्रविष्टि के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करें।

इस वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि जमीनी विवादों का समाधान और पारदर्शी राजस्व प्रबंधन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिलाधिकारी की इस दूरदर्शी सोच और भूमि उप समाहर्ता के तकनीकी मार्गदर्शन से अब जिले के अंचल स्तर पर लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन की एक नई राह प्रशस्त हुई है।

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