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मक्का मदीना तीर्थ करने जा रहे हज यात्रियों का विदाई

सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट 

 मक्का मदीना में प्रति वर्ष होने वाली तीर्थ यात्रा के लिए निकले चरका पत्थर थाना क्षेत्र अंतर्गत तारबांक सरकंडा गांव निवासी मो० मंसुर अंशारी एवं मो० युसुफ अंशारी को ग्रामीणों द्वारा विदाई समारोह आयोजित कर उन्हें विदा किया गया , एवं इस हज यात्रा की सफलता के लिए कामना की गई । बाइस दिनों की इस हज यात्रा पर निकले मो० मंसुर एवं मो० युसुफ एक समाज सेवी के रूप में जाने जाते हैं , इन दोनों की हज यात्रा की सफलता के लिए लोगों ने ईश्वर से कामना की । विदाई समारोह में शामिल लोगों में खुर्शीद आलम , मो० क्युम , मो० अब्बास , मो० मोईन , मो० रजाउल , मो० सागरीम तथा मो० अलाउद्दीन आदि शामिल थे । ज्ञात हो कि सउदी अरब स्थित मक्का मदीना एक इस्लामिक तीर्थ ओर मुस्लिम समुदाय का पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है , जहां पर विश्व का सबसे बड़ा जमावड़ा लगती है । यह इस्लाम धर्म के पांच मुल स्तंभ में से एक है । बताया जाता है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने जीवन काल में कम-से-कम एक बार इस हज यात्रा के लिए मक्का मदीना अवश्य जाना चाहिए । मक्का मदीना जाने पर होने वाली खर्च उठा पाने में सक्षम तथा शरीर से स्वस्थ मुस्लिम समुदाय के चाहे वो स्त्री हो या पुरुष उन्हें इस उमरा हज का यात्रा अवश्य करना चाहिए । बताया जाता है कि मुस्लिम समुदाय के जो भी लोग इस हज यात्रा को पुरा करते हैं वे मुस्ताती कहलाते हैं । बताया जाता है कि सातवीं शताब्दी से हज यात्रा इस्लामी पैगंबर मोहम्मद की जीवन के साथ जुड़ी हुई है । लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोग मानते हैं कि मक्का मदीना के तीर्थ यात्रा की यह रश्म मो० इब्राहिम के समय से चली आ रही है । लिहाजा हज यात्रा पर निकले सभी तीर्थ यात्री लाखों लोगों की जुलूस में शामिल होते हैं जो एक साथ हज के लिए मक्का मदीना में जमा होकर कई अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हुए प्रत्येक व्यक्ति एक घनाकार इमारत काबा के चारों ओर सात बार परिक्रमा करते हैं ।

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