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सौम्यता, सुचिता और विनम्रता का प्रतीक प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह

सौम्यता, सुचिता और विनम्रता का प्रतीक प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह

रोहतास संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट 

बिक्रमगंज ( रोहतास)  रोहतास जिले के अकोढ़ीगोला प्रखंड के जगजीवन छेदी राम बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह का आकस्मिक निधन न केवल शिक्षा जगत बल्कि सभ्य समाज के लिए हुई अपूर्णीय क्षति है। वे एक सफल प्रधानाचार्य के साथ -साथ एक दरिया दिल महामानव थे। उनका जीवन खुले किताब की तरह था।

शायद उनको अपने लघु जीवन का भान बहुत पहले ही हो चुका था। तभी तो वे किसी से कोई गिले -शिकवे नहीं रखते थे और बड़ी गरमजोशी से आम से आम और खास से खास लोगों से समान रूप से समान रूप से मिलते थे।

जिले के एक नामचीन परिवार में जन्मे उच्च योग्यताधारी महामानव को अहंकार छू तक नहीं पाया था। जिस पेशा के लोगों से वे मिलते थे, उन्हें लगता था की इस पेशा की इन्हें गहरी समझ और इसके प्रति गहरा सम्मान है।अपनी पहली मुलाक़ात में ही वे सामने वाले के दिल में विशेष जगह बना लेते थे।

उनके आवसीय शहर बिक्रमगंज के चौक चौराहों और चाय -पान की दुकानों पर लोग बातचीत करते मिले कि अनिल बाबू जैसा नयी पीढ़ी में इंसान मिलना नामुमकिन है। किसी को सहयोग करना मानो उनका धर्म था।

      ऐसे महापुरुष का जन्म रोहतास जिले के काराकाट प्रखंड के सोनबरसा गाँव के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिताजी स्वर्गीय श्यामदेव सिंह तकरीबन 30 साल तक अपने पंचायत के मुखिया रहे। मुखिया जी के चार पुत्रों में अनिल जी तीसरे थे। इनका परिवार भरा -पूरा है और कुल सदस्यों की संख्या करीब 140 है।

झारखण्ड के राँची और हजारीबाग में अधिकांश लोग ससम्मान रहते हैं। घर में कई डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और राजपत्रित अधिकारी हैं।उनके ससुरजी शिवहर के जिलाधिकारी और साले प्रोफेसर रहे हैं।फिर भी स्वर्गीय प्रधानाचार्य का व्यक्तित्व अत्यंत सरल और उदात रहा।

      इनका बचपन अपने पिताजी की छत्र -छाया में सानन्द बीता। प्रारम्भिक शिक्षा ग्रामीण परिवेश में और उच्च शिक्षा राजधानी पटना से हुई। बचपन से ही ये मिलनसार और कुशाग्र बुद्धि के थे। छोटे भाई होने के कारण सबका प्यार भी इन्हें खूब मिला।

वर्ष 1997में इनकी नियुक्ति सहायक शिक्षक के रूप में भोजपुर जिले के उच्च विद्यालय बड़गांव में हुई। लगभग 9साल के कार्यकाल में इन्होने छात्र -छात्राओं सहित अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से भी निकट का सम्बन्ध स्थापित कर लिये ।

2006में परिवारिक कारणों से अपना स्थानांतरण इंटर स्कूल बिक्रमगंज, रोहतास में करवाये। कुछ वर्षों बाद यहाँ के प्रभारी प्रधानाध्यापक भी बने। अपने कार्यकाल में इन्होने विद्यालय का चहुमुखी विकास किया।

वन विभाग के अधिकारीयों से बेहतर समन्वय स्थापित कर विद्यालय में सैकड़ो वृक्षारोपण करवाये। अपने गाँव में भी एक हजार से ज्यादा वृक्षारोपण करवाये।वृक्षारोपण कार्यक्रम को वे उत्सव का रूप देते थे, जो अन्य के लिए प्रेरणा का strot बनता गया।

     बचपन से ही खेल कूद में इनकी गहरी अभिरूचि थी।आज भी इलाके के लोग इन्हें बेस्ट बॉली बॉलर के रूप में याद करते हैं।अमीर -गरीब किसी के घर शादी विवाह में पहुँचना और आवश्यक्तानुसार सहयोग करना इनकी फितरत में शामिल था।

     लगभग दो वर्ष पूर्व जगजीवन छेदी राम उच्च माध्यमिक विद्यालय मधुरामपुर में प्रधानाध्यापक के रूप में योगदान दिये तथा विद्यालय के जीर्णोद्धार में कोई कोर कसर नहीं छोडी। विद्यालय की पठन -पाठन व्यवस्था तो पहले से ही ठीक थी लेकिन उसे और बेहतर बनाया।

अपने सहकर्मियों के साथ पारिवारिक सदस्यों सा रिश्ता निभाते रहे। इसी बीच दिसंबर 2025में इन्हें शवश्न सम्बन्धी हल्की समस्या महसूस हुई। राँची, पटना और दिल्ली के नामचीन अस्पतालों में इलाज के बावजूद 21मार्च 2026को सुबह वे स्वर्गगामी हो गये।

अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी, डॉक्टर बिटिया, दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पुत्र और लम्बे -चौड़े परिवार के सदस्यों सहित हजारों मित्रों को छोड़ गये।हम सभी ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि उन्हें अपने चरणों में जगह दें।

       उनकी शव यात्रा से लेकर श्राद्ध कर्म तक उनके चाहने वालों की अश्रुपूर्ण आँखों के साथ भारी भीड़ लगी रही जो हमें सीख देती है कि इंसान के जीवन काल में समाज उसका इतिहास लिखता है और चले जाने के बाद उसे पढ़ा जाता है।ऐसे पुरुष विरले पैदा होते हैं।

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