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कौन चोरी कर रहा है रेल ट्रैक से फिश प्लेट, 200 प्लेटें चोरी होने का है मामला

भारतीय रेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरपीएफ, जीआरपी के साथ-साथ रेलवे की स्टाफ जगह-जगह तैनात किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी रेलवे की सुरक्षा में किसी न किसी तरह सेंध लगाने वाले अपने कार्यों में कामयाब हो जाते हैं।

शिकायत के बाद भी अधिकारी हैं मौन

दे रहे हैं अलग-अलग तरह की दलील

परेवा से बसरतिया गेट के बीच में हर महीने होती है चोरी

कहीं वंदे भारत को डिटेल करने की साजिश तो नहीं

चंदौली  जिले में भारतीय रेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरपीएफ, जीआरपी के साथ-साथ रेलवे की स्टाफ जगह-जगह तैनात किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी रेलवे की सुरक्षा में किसी न किसी तरह सेंध लगाने वाले अपने कार्यों में कामयाब हो जाते हैं। अभी हाल ही में एक मामला आया है जिसमें फिश प्लेट या जुगल प्लेट को चोरी करने के मामले में कीमैन द्वारा लगातार मेमो देने के बाद भी उस पर कार्यवाही न होने के कारण ऐसे चोरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। जिस ट्रैक से वंदे भारत जैसी ट्रेन गुजरती हो उस पर ऐसी लापरवाही ध्यान देने लायक है।

आपको बता दें कि चंदौली जिले के क्षेत्र में सैयदराजा थाना क्षेत्र की गेट संख्या 70 परेवा से लेकर गेट संख्या 81 बसरतिया इलाके में इस तरह की घटना संज्ञान में आ रही है। वैसे यह इलाका  मानसनगर आरपीएफ के क्षेत्राधिकार में आता है और उसको मामले में एक्शन लेना है। परेवा से लेकर  बसरतिया  तक लगभग 200 फिश प्लेट या जुगल प्लेट गायब होने की कहानी कहीं ना कहीं एक बड़ी घटना को अंजाम देने वाली लग रही है।

बताया जा रहा है कि इसके पूर्व में इसी क्षेत्र में डाउन की तरफ से जा रही राजधानी को गटर रखकर डिटेल करने की साजिश हुई थी और उसके कुछ ही महीने बाद डाउन की तरफ जा रही कालका एक्सप्रेस को भी एक राड रखकर गिरने की साजिश रची गई थी। लेकिन सतर्कता से इस साजिश को सफलता नहीं मिली।

इस मामले में आरपीएफ एवं अन्य एजेंसियों द्वारा जांच की गई और सारे मामले में लीपापोती ही हुई।

वैसे ही फिश प्लेट या जुगल प्लेट के मामले में चाबीमैन द्वारा लगातार मेमो देकर इस घटना की जानकारी अपने विभाग तथा सुरक्षा एजेंसी तथा आरपीएफ को देकर अवगत कराया जाता है। लेकिन इसके बाद भी कोई कार्यवाही न होने के कारण इस घटना को अंजाम में देने वालों का हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।  सूत्रों की माने तो अप्रैल माह में 7 अप्रैल 2024 को 668 किलोमीटर /17A पर थर्ड लाइन की  6 जोड़ा जुगल प्लेट खोली गई थी।  वहीं दिनांक 22 अप्रैल 2024 को 643 /19 तथा ब्रिज नंबर 698 स्पैन संख्या 7,8 पर लगभग तीन जोड़ा खोला गया था।

इसके अलावा  दिनांक 27 अप्रैल 2024 को किलोमीटर 665 का 5/7 से 4 जोड़े जुगल प्लेट खुलने की जानकारी मिल रही है। इसके बावजूद चाबी मैन द्वारा इन सभी जुगल प्लेट खोलने की जानकारी पीडब्ल्यूई को भी दी गई है ।

इस संबंध में तत्कालीन PWI से बात हुयी तो उन्होंने बताया कि अभी हम छुट्टी पर हैं और इस समय चार्ज राजकुमार को दिया गया है, उनसे सारी जानकारी मिल पाएगी। जब इस संबंध में प्रभारी पी डब्ल्यू ई राजकुमार से वार्ता हुई तो उन्होंने बताया कि प्लेट खुलने की बात सही है और प्रतिदिन प्लेट खुल रही हैं लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो इस प्लेट का कोई असर नहीं पड़ता है।

इस संबंध में यह भी कहा जाता है कि गर्मी में लाइन टेंपरेचर अधिक होने के कारण फैलती है जबकि ठंडी में अधिक ठंड पड़ने के कारण यह लाइन सिकुड़ती रहती है जिसके कारण लाइन के क्रेक होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए जॉइंट के स्थान पर जुगल प्लेट लगाकर उसे एरिया को मजबूत करने का कार्य अंग्रेज के जमाने से चला आ रहा है, लेकिन अब इस चोरी को छुपाने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा नित्य नए बहाने बताकर मामले को रफा दफा करने में जुटे रहते हैं।

अब देखना है कि  उच्च अधिकारियों द्वारा इस मामले का संज्ञान किस प्रकार लिया जाता है। या ऐसे ही रेल की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता रहता है। कुछ अधिकारियों के लापरवाही के कारण  कभी न कभी बड़ी घटना घट सकती है।

चंदौली ब्यूरो चीफ – नितेश सिंह यादव की रिपोर्ट

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