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बिहारराज्यरोहतास

सावन की शिवरात्रि मंदिरों में लगी भीड़

रोहतास दावथ संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट 

दावथ (रोहतास) सावन माह की शिवरात्रि पर दावथ प्रखंड के मंदिरों में भीड़ उमड़ी हुई है। मंदिर भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठे है।

सावन का महीना महादेव के भक्तों के लिए काफी पवित्र महीना होता है, और ऐसा माना जाता है कि इस महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना से उनकी प्रसन्नता जल्दी प्राप्त होती है।

यूं तो इस पावन महीने का हर दिन महादेव की पूजा और जलाभिषेक के खास होता है। लेकिन सावन में पड़ने वाले सोमवार और शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है।

देवढी के प्राचीन शिव मंदिर, दावथ बुढ़वा शिव मंदिर, सकलेश्वर नाथ मंदिर पंच मंदिर, में दूर-दूर से पहुंचे शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया।

  योगिनी स्थित प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर में, जहां आम दिनों की तुलना में आज सुबह से ही कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था ।

इस मंदिर में दावथ प्रखंड ही नहीं बल्कि बाहर से भी कांवड़िए महादेव को जलाभिषेक करने पहुंचे थे।

पंडित चारों धाम मिश्रा ने बताया कि, हिंदू पंचांग में हर साल 12 शिवरात्रि होती हैं, लेकिन इनमें से दो शिवरात्रि का खास महत्व दिया जाता है।

इनमें सबसे प्रमुख फाल्गुन मास की शिवरात्रि मानी जाती है, जिसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है। वहीं इसके अतिरिक्त दूसरी महत्वपूर्ण शिवरात्रि सावन की मानी जाती है।

इस दिन विधि-विधान से शिव जी की पूजा की जाती है।सनातन धर्म में श्रावण मास की महिमा का वर्णन किया गया है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों पर महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और उन्हें उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

शिवरात्रि पर शिवलिंग का रुद्राभिषेक का बड़ा महत्व है. इस दिन जल, घी, दूध, शक्कर, शहद, दही आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।

शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं जाते हैं, साथ ही धूप, दीप, फल और फूल आदि अपर्ण कर पूजा की जाती है।

शिव पूजा करते समय शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक के पाठ का विधान है।

ऐसी मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत करने से मुश्किल कार्य आसान हो जाते हैं और व्रती की सारी समस्याएं दूर होती हैं।

साथ ही जो कन्याएं मनोवांछित वर पाना चाहती हैं, इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है।विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर हो जाती है।

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