[wpdts-weekday-name] [wpdts-day]/ [wpdts-month]/ [wpdts-year] 

रेलवे संघर्ष समिति बिहटा अरवल एवं औरंगाबाद का आज दिल्ली के जंतर मंतर पर होगा धरना प्रदर्शनडबल म*र्डर के मुख्य आरोपी पप्पू सिंह ने किया सरेंडरडीएम सीतामढ़ी ने पंचायती राज विभाग की योजनाओं की समीक्षा, सोलर स्ट्रीट लाइट योजना पर जताई नाराजगीजनसमस्याओं के तत्वरित समाधान को लेकर जनता दरबार कार्यक्रम नए स्वरूप में आयोजितनरकटियागंज से पाटलिपुत्र के लिए प्रतिदिन 4 ट्रेनें जाती है और आती 3 है…..मैट्रिक, इंटर परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए रेलवे का बड़ा फैसला, दो जोड़ी मेमू ट्रेन का विभिन्न हॉल्ट पर एक मिनट का दिया गया ठहराव।बटिया पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चेकिंग के दौरान पिक अप वाहन जप्त, 486 लीटर विदेशी शराब बरामद, चालक गिरफ्तारबरन कन्या उत्थान न्यास समिति द्वारा गया में कार्यक्रम आयोजित कर छह बेटियों को दी गई आर्थिक सहयोग, बतौर मुख्य अतिथि ओंकारनाथ बरनवाल हुए शामिलविभिन्न मांगों को लेकर तीन दिनो से लगातार चकाई में अनसन पर बैठे अनसन कारियों को पुर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद ने तुड़वाया अनसनएसपी स्वर्ण प्रभात ने दो दारोगा को किया सस्पेंड- कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप
Viral Videoजमुईटॉप न्यूज़बिहारराज्य

पूर्व रेल चालक रंजन कुमार साहा की मौत के उपरांत, पत्नी रेणु साहा, एकलौती पुत्री रंजना साहा ने मृतक को संयुक्त रूप दिया मुखाग्नि। समाजिक कुरीतियों को तोड़ा? बना मिशाल

पूर्व रेल चालक रंजन कुमार साहा की मौत के उपरांत, पत्नी रेणु साहा, एकलौती पुत्री रंजना साहा ने मृतक को संयुक्त रूप दिया मुखाग्नि। समाजिक कुरीतियों को तोड़ा? बना मिशाल।

जमुई जिला ब्यूरो बिरेंद्र कुमार की रिपोर्ट 

झाझा तालाब रोड के निवासी, पूर्व मध्य रेल के, रेल चालक रंजन कुमार शाह की नेचुरल डेथ हो गई।

ऐसे में आपको पता है कि समाज में बेटियों को मुख्य अग्नि या फिर शमशान घाट तक जाने की मनाही होती है।

लेकिन मृतक रंजन कुमार साहा,की पत्नी रेणु साहा एकमात्र बेटी रंजन साहा,न सिर्फ श्मशान घाट तक गई बल्कि दोनों ने संयुक्त रूप से अपने पति और अपने पिता की चिता पर रखें शव को मुखाग्नि देकर एक मिशाल कायम किया।

वैसे भी हिंदू संस्कार में बहुत सारी बातें हैं जो महिलाओं पर ही लागू होती हैं।

आज दोनों महिलाओं ने समाज के मिथक को तोड़ते हुए एक तरह से नया उदाहरण देने का काम किया है।

भले ही हिंदू संस्कार में बेटों को मुखाग्नि देने का अधिकार है। लेकिन अभी भी कहीं-कहीं बेटे के नहीं रहने पर बेटियां अपने माता-पिता को मुखाग्नि देने का काम कर रहीं हैं।

सम्भवतः झाझा शहर की ये पहली घटना होगी? जहां संयुक्त रूप से, कहने का साफ मतलब है दो महिलाओं ने किसी( पुरुष) पिता के शव को मुखाग्नि दी हो?

खुदरा व्यापार संघ के पूर्व मंत्री एवं गौशाला के प्रमुख कर्ताधर्ता सोनू वर्णवाल ने बताया कि ऐसा आज तक नहीं हुआ कि झाझा शहर में एक शव को दो-दो महिलाओं ने मुखाग्नि दी हो यह एक तरह से झाझा प्रखंड की पहली घटना है।

शव यात्रा में मुख्य रूप से, प्रशांत साहा, मोहन सरकार दा, सोनू बर्नवाल, कोका साहा, विजय साहा, एवम् समाज के अन्य लोग शामिल हुए।

Check Also
Close