
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, सत्य और कर्तव्य का सबसे बड़ा उदाहरण है।- वाल्मीकि दास
रोहतास दावथ संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट
दावथ (रोहतास ) राम ने अयोध्या का राजपद एक पल में छोड़ दिया, केवल पिता के वचन को निभाने के लिए। आज के समय में जहां लोग छोटे-छोटे स्वार्थ के लिए रिश्ते तोड़ देते हैं, वहीं राम ने 14 वर्ष का वनवास हंसते-हंसते स्वीकार कर लिया। यह हमें सिखाता है कि पद से बड़ा धर्म होता है। यह बातें अयोध्या से पधारे संत बाल्मीकि दास ने परमेश्वरपुर कुटी धाम मालियाबाग में कहीं!
आगे उन्होंने कहा कि राम ने कभी किसी से भेदभाव नहीं किया। उन्होंने केवट, शबरी और वानर सेना को गले लगाया। उनका जीवन बताता है कि सच्चा राजा वह है जो अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी अपनाए।
संकट में भी राम ने धैर्य नहीं खोया। सीता हरण के बाद भी उन्होंने अधीरता नहीं दिखाई, बल्कि साहस और योजना से लंका पर विजय पाई। यही हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाई आए, धैर्य और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।



















