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भारतीय संस्कृति विश्व का धरोहर: – आरिफ मोहम्मद

भारतीय संस्कृति विश्व का धरोहर: – आरिफ मोहम्मद

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने भारतीय नववर्ष के महत्व को बताया। ‌

रोहतास संवाददाता चारोधाम मिश्रा की रिपोर्ट 

 बिक्रमगंज (रोहतास)। द डिवाइन पब्लिक स्कूल धावां बिक्रमगंज में आयोजित भारतीय नववर्ष उत्सव में पहुंचे बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भारतीय संस्कृति को ‌ विश्व का धरोहर बताया।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शुद्धिकरण की विशेषता है। जिस प्रकार गंगा में प्रवाहित अशुद्धियों का स्वत: शुद्धिकरण हो जाता है,उसी तरह भारतीय संस्कृति सभी संस्कृति एवं सभ्यताओं को शुद्धता प्रदान किया है।

वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना का वर्णन करते हुए उन्होंने भारतीय प्राचीनतम ज्ञान को पुनर्स्थापित करने पर बल देते हुए स्वयं की नवीनीकरण और संकल्प की आवश्यकता बताई।

सनातन के श्रेष्ठ पुरोधा आदि शंकराचार्य के जीवन वृत्त को रखते हुए उन्होंने बताया कि शंकराचार्य ने भी माना है कि ज्ञान का अर्थ मानस का विस्तार होना चाहिए। अंत में सेवा को पूजा और शरीर को परमात्मा का मंदिर बताते हुए भारतीय परंपरा को जीवंत रखने का अपील किया।

        राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार भारतीय नव वर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक अरब 98 करोड़ वर्ष पूर्व ब्रह्मांड में पृथ्वी ने अपने अस्तित्व को प्राप्त किया था। इसके साथ ही कई गौरवशाली परिवर्तन इस दिन से जुड़ा हुआ है। जो नवीनतम का परिचायक है।

इसके साथ ही चार विकार क्रोध, घृणा, अपशब्द एवं तृष्णा का वर्णन करते हुए इसका स्थान मानव शरीर को बताया और मानवों को इससे मुक्ति पाने का अनुरोध किया।

जैन मुनि लोकेश जी ने भारतीय संस्कृति को अनेकता में एकता मौलिकता की विशेषता होना बताते हुए देश के उत्थान एवं नवनिर्माण का लोगों से अपील किया। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भारतीय नववर्ष को वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप ने अपने उद्बोधन में भारतीय गौरवशाली इतिहास का बोध कराते हुए इसके प्रति समर्पण भाव जागृति का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन पूर्व विधायक राजेश्वर राज एवं स्वागत भाषण द डीपीएस के सह निदेशक अखिलेश कुमार ने किया। सभी अतिथियों का सम्मान अंग वस्त्र मोमेंटो एवं तुलसी पौधा से किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत एवं समापन विद्यालय की छात्राओं ने राष्ट्रगान गाकर किया। आचार्याओं द्वारा मंगलाचरण एवं शंखनाद तथा घरवासडीह मठ के पंचम पीठाधीश्वर द्वारा आशीर्वचन किया गया।

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